लखनऊ। सुशांत गोल्फ सिटी हाईटेक टाउनशिप अंसल में 100 करोड़ रुपये की लागत से 13 बिल्डरों के लिए बिजली नेटवर्क विकसित करने की तैयारी है। शासन, शक्ति भवन और मध्यांचल निगम इस परियोजना पर काम कर रहे हैं।
मध्यांचल निगम ने इसका प्रस्ताव एलडीए को भेजा था, मगर कुछ आपत्तियों के कारण यह फाइल वापस हो गई है। अब आपत्तियों का निराकरण कर प्रस्ताव दोबारा एलडीए भेजा जाएगा। हालांकि, एलडीए बोर्ड की मंजूरी के बाद ही यह योजना धरातल पर उतरेगी। बिल्डरों ने इस पर खर्च होने वाली रकम देने का भरोसा दिया है।
दस माह पहले बिल्डर जनार्दन अग्रवाल, सुनील मिगलानी, अतुल सक्सेना और मनोज अग्रवाल ने एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को पत्र लिखा था और बताया था कि खरीदारों को दो साल के अंदर कब्जे देने हैं। अपार्टमेंट, मॉल और सोसाइटी के काम पूरे करने के लिए बिजली का स्रोत नहीं है। इसके बाद से ही बिजली नेटवर्क विकसित करने की फाइल दौड़ रही है।
बिजली आपूर्ति की योजना
शासन की पैरवी पर मध्यांचल निगम ने बिजली आपूर्ति की योजना बनाई है। 220 केवी आवास विकास ट्रांसमिशन उपकेंद्र से काम शुरू होगा। उसी परिसर में 33 केवी के दो स्विचिंग सब स्टेशन बनाए जाएंगे। इन सब स्टेशनों से चार 33 केवी फीडर निकाले जाएंगे। ये फीडर बिल्डरों के परिसर तक नेटवर्क पहुंचाएंगे।
नियम : 20 एमवीए से ज्यादा लोड पर ट्रांसमिशन उपकेंद्र बनाना जरूरी
बिजली सप्लाई कोड के नियम इस काम में पेच फंसा दिया है। नियमानुसार 20 एमवीए से ज्यादा विद्युत लोड पर 132 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र बनाना होता है। इसका पूरा खर्च बिल्डरों को ही उठाना पड़ता है। हालांकि, अंसल में एक मॉल को कनेक्शन देने के लिए यह नियम पहले ही शिथिल किया जा चुका है। जिन बिल्डरों ने बिजली कनेक्शन मांगे हैं, उनमें ओरो इंफ्रा, आर्शय वेंचर, महेश इंफ्रा, प्लेटिनम मॉल, कनक बिहारी बिल्डर, जश्न रियल्टी, मिगशन, आरआर सिविल टेक, आरएलवी वेंचर, रिशिता डवलपर्स और एनसीसी सहित कुल 16 लोग शामिल हैं।
Iबिल्डरों को बिजली देने के लिए एलडीए और ऊर्जा विभाग के बीच बातचीत चल रही है। इस बातचीत का परिणाम आने पर आगे की कार्रवाई होगी। इस कार्रवाई के तहत अंसल में उपकेंद्र बनाने के लिए भूखंड देना होगा।I
I- रवि कुमार अग्रवाल, मुख्य अभियंता, लखनऊ मध्यI