बिजली कंपनियों ने 2019-20 में लगभग 4500 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई का फैसला राज्य विद्युत नियामक आयोग पर छोड़ दिया है। कंपनियों ने 2019-20 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में कमियों पर नियामक आयोग में जवाब दाखिल कर दिया है लेकिन घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव नहीं सौंपा है।
बिजली कंपनियों की तरफ से कहा गया है कि घाटे की भरपाई के लिए आयोग अपने स्तर से निर्णय करे। बिजली कंपनियों की ओर से दाखिल एआरआर में इस साल लाइन हानियों में करीब छह फीसदी की वृद्धि का अनुमान जताते हुए आमदनी और खर्च में लगभग 4500 करोड़ रुपये का अंतर रहने की संभावना जताई गई है।
दिलचस्प बात यह है कि इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली कंपनियों ने श्रेणीवार दरों में कोई वृद्धि प्रस्तावित नहीं की है। सुधार के बड़े-बड़े दावों को बावजूद इस साल वितरण हानियां 17.90 प्रतिशत प्रस्तावित की गई हैं जबकि पिछले साल आयोग ने वितरण हानियां 11.96 प्रतिशत अनुमोदित की थीं। अब दरों का मामला आयोग के पाले में आ गया है। सूत्रों के अनुसार आयोग जल्द ही दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगा।