चुनाव से पहले दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश में भी घरेलू बिजली की दरें कम करके सरकार जनता को राहत दे सकती है।
दरों में कमी के लिए पड़ रहे चौतरफा दबाव के बाद सरकार घरेलू बिजली दरों को कम गंभीर नजर आ रही है।
पार्टी के भीतर भी इसके लिए आवाज उठने से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। शासन स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार माथापच्ची चल रही है।
शासन ने बिजली दरों में कमी करने को लेकर पावर कार्पोरेशन व राज्य विद्युत नियामक आयोग से शनिवार तक रिपोर्ट भी तलब की है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार पर बिजली दरें कम करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। राज्य योजना आयोग और नियोजन विभाग ने ऊर्जा विभाग से पूछा है कि कैसे दरों में थोड़ी-बहुत कमी की जा सकती है।
इस मसले पर वित्त विभाग से भी राय मांगी गई है लेकिन उसने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए इसके लिए अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अब ऊर्जा विभाग ने पावर कार्पोरेशन और राज्य विद्युत नियामक आयोग से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग के अनुसचिव अजीत कुमार ने बृहस्पतिवार को पावर कार्पोरेशन के एमडी व नियामक आयोग के सचिव को पत्र भेजा है।
नियोजन विभाग की ओर से 23 जनवरी 14 को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का पत्र संलग्न करते हुए भेजे गए पत्र पर दो दिन के भीतर निश्चित रूप से रिपोर्ट देने को कहा है।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि चूंकि बिजली दरों का निर्धारण विद्युत नियामक आयोग करता है इसलिए शासन पावर कार्पोरेशन के साथ-साथ उसकी भी राय ले लेना चाहता है।
आयोग अगर सकारात्मक रिपोर्ट भेजता है तो सरकार इस बारे में जल्द ही कोई निर्णय कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि शासन स्तर पर बिजली दरों में कमी को लेकर हलचल काफी तेज है।
शासन अब इस मामले को ज्यादा लटकाना नहीं चाहता। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के नेता भी सरकार पर बिजली दरों में कमी का दबाव बनाए हुए हैं ताकि चुनाव में इसका लाभ मिल सके।