विधानसभा चुनाव के दौरान इन दिनों लोग निर्वाचन आयोग के टॉल फ्री नंबर पर अजब-गजब शिकायतें कर रहे हैं। इनमें साइकिल से बूथ पर पहुंचकर वोट डालने, पुलिस कर्मियों द्वारा पक्षपात करने और पोलिंग एजेंट को बूथ के बाहर करने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
यही नहीं, मोबाइल फोन रिचार्ज न होने, इंटरनेट स्लो चलने, मकान पर पोस्टर चिपकाने और चुनावी गाड़ियों के शोर की भी शिकायतें आ रही हैं। रोजाना सैकड़ों की तादाद में आ रही ये शिकायतें आयोग के लिए सिरदर्द साबित हो रही हैं। आयोग अपने स्तर से इनका समाधान करता है और जो शिकायतें चुनाव से संबंधित नहीं होतीं, उनके बारे में स्थानीय पुलिस को फोन करने की नसीहत दे रहा है।
आयोग के एक अधिकारी की मानें तो अब तक 35 हजार से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें से लगभग साढ़े 12 हजार शिकायतें समाधान पोर्टल पर, 15 हजार हेल्पलाइन नंबर पर और बाकी डाक से या हाथोंहाथ मिली हैं।
सबसे ज्यादा ये शिकायतें
डेमो पिक
इनमें सबसे अधिक शिकायतें आम जनता की हैं। आयोग का दावा है कि 90 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है। कुछ पर जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और कुछ को निपटारे के लिए भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजा गया है।
आयोग को मिल रहीं शिकायतों से सबसे अधिक शिकायतें वोटर लिस्ट में नाम न होने की हैं। वहीं, कुछ की शिकायत है कि उसके वोटर आईडी नंबर पर दूसरे को वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिया गया है।
वोटर आईडी पहुंचाने में बीएलओ की मनमानी के साथ ही कुछ जिलों से वोटर आईडी कार्ड और मतदाता पर्ची न पहुंचने की शिकायतें भी आ रही हैं।
शिकायत करने में ये पार्टी सबसे आगे
डेमो पिक
आयोग के एक अधिकारी की मानें तो शिकायत करने में राजनीतिक दलों में भाजपा नंबर एक पर है। वह न सिर्फ लखनऊ बल्कि दिल्ली स्थित आयोग के केंद्रीय कार्यालय पर भी सीधे शिकायतें भेज रही है। बसपा की ओर से काफी कम शिकायतें आयोग के पास आई हैं। कांग्रेस और सपा की भी नाममात्र की ही शिकायतें आई हैं।
भाजपा के नेताओं ने सोमवार को आयोग से समाजवादी पार्टी के प्रचार के वीडियो में चलती मेट्रो को हटाए जाने की मांग की। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर ने बताया कि लखनऊ में न तो पूरी तरह से ट्रैक बिछाया गया है और न ही मेट्रो का कोई स्टेशन बना है।
राजधानी में कहीं भी मेट्रो नहीं चल रही है। सपा झूठा प्रचार कर रही है। स्टेडियम भी नहीं बना है। आयोग को मेट्रो और स्टेडियम से जुड़े विज्ञापनों पर रोक लगानी चाहिए।