चुनाव आयोग ने भाजपा के इलेक्शन कैंपेन के लिए बनाए गए वीडियो में कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। लगभग चार मिनट के वीडियो में मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर आयोग ने एतराज जताया है।
उसने भाजपा से इसे संशोधित कर दोबारा भेजने को कहा है। वीडियो में प्रदेश की बदहाल व्यवस्था को दिखाया गया है। साथ ही जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकार है उसका गुणगान किया गया है।
सूत्रों की मानें तो आयोग को जिन बातों पर एतराज है उसमें भाजपा की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक का अपने पक्ष में इस्तेमाल करना, राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह का भाषण डालना, अखिलेश यादव की लैपटॉप योजना को घोटाला बताना, दंगे की तस्वीर का इस्तेमाल और ब्यूरोक्रेट्स की तस्वीरों को इस्तेमाल करना शामिल है।
इसके अलावा वीडियो में इस्तेमाल कुछ शब्दों को आयोग ने गलत बताया है। इसमें एक स्थान पर सर्जिकल स्ट्राइक और उसके बारे में भाजपा अध्यक्ष का भाषण है।
आगजनी की एक तस्वीर पर भी आपत्ति
डेमो पिक
- फोटो : amar ujala
आयोग का मानना है कि चुनाव प्रचार के लिए सेना का इस्तेमाल विज्ञापनों में नहीं किया जा सकता। वीडियो में एक स्थान पर यूपी में भाजपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्रियों की तस्वीर और भाषण दिखाए गए हैं।
इसमें कल्याण सिंह भी शामिल हैं। गवर्नर और राष्ट्रपति किसी पार्टी का प्रचार नहीं कर सकते। कोई भी गवर्नर किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं कर सकता। आयोग ने अखिलेश सरकार की लैपटॉप योजना को घोटाला बताने पर भी एतराज किया है।
सूत्रों की मानें तो आयोग का तर्क है कि इस बारे में न तो कहीं शिकायत की गई है और न ही कोई जांच चल रही है। वीडियो में एक स्थान पर दंगे में आगजनी की एक तस्वीर पर भी आयोग ने आपत्ति की है और उसे वीडियो से हटाने के निर्देश दिए हैं।
इसमें प्रदेश के कुछअधिकारियों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। इन्हें भी हटाने के लिए कहा गया है। वीडियो में कानून व्यवस्था, शिक्षा, बेरोजगारी और बिजली व्यवस्था को लेकर बदहाली की तस्वीर दिखाई गई है।