चुनाव आयोग ने अब सरकारी वेबसाइटों पर अपनी नजरें टेढ़ी कर दी है। आयोग ने इन वेबसाइटों से उपलब्धियों के बखान तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं।
आयोग का यह फरमान केंद्र व राज्य दोनों सरकारों की आधिकारिक वेबसाइटों के लिए लागू होगा। आयोग ने भी यह माना है कि केंद्र व प्रदेश के सत्ताधारी दल चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं शांतिपूर्वक मतदान कराने के लिए कई कदम उठा रहा है।
इसी कड़ी में अब सरकारी वेबसाइटों से उपलब्धियों व प्रचार संबंधी सामग्री हटाने के लिए कहा गया है। आयोग ने इसे भी आदर्श आचार संहिता के दायरे में माना है।
आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान केंद्र व राज्य सरकारें आधिकारिक वेबसाइटों से मंत्रियों, राजनीतिक दलों एवं राजनेताओं की उपलब्धियों एवं प्रचार संबंधी सभी विवरण तत्काल हटा लें।
दरअसल, सत्ताधारी दलों के कई मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। यह हाल केंद्र व प्रदेश दोनों ही सरकारों में है। सरकारी वेबसाइटें इन नेताओं के बडे़-बड़े फोटो व उपलब्धियों के बखान से पटी पड़ी हैं।
सत्तारूढ़ दल सरकारी मशीनरी का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। इसी को देखते हुए आयोग ने यह सख्त फैसला किया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने बताया कि चुनाव आयोग के संज्ञान में आया है कि राजनीतिक पार्टियों एवं प्रत्याशियों के लिए जारी आदर्श आचार संहिता में दिए गए दिशा-निर्देशों का सही ढंग से अनुपालन नहीं हो रहा है।
इसीलिए आयोग ने केंद्र व राज्य के सत्ताधारी दलों को चुनाव प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से बचने के निर्देश दिए हैं।