लखनऊ। साइबर ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर एलडीए कॉलोनी सेक्टर-एल आशियाना निवासी तारावती (65) को चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख 52 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने आतंकी गतिविधियों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देकर उनसे एफडी तुड़वाई और तीन बार में रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली। पीड़िता की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में शनिवार को एफआईआर दर्ज की गई है।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर आलोक राव के मुताबिक, 28 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे तारावती के पास फोन आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम अभिषेक यादव बताते हुए खुद को एटीएस कार्यालय, पुणे का अधिकारी बताया। उसने कहा कि तारावती का फोन आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है और जम्मू-कश्मीर में एचडीएफसी बैंक में उनके नाम से एक संयुक्त खाता खोला गया है। इसमें सात करोड़ रुपये का लेन-देन होने और 70 लाख रुपये कमीशन के रूप में मिलने का आरोप लगाया गया।
ठग ने महिला को बताया कि मामले की जांच एटीएस और एनआईए कर रही है। सहयोग न करने पर गिरफ्तारी वारंट जारी होने और मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज कर आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा होने की धमकी दी गई।
किसी से बात करने पर जेल भेजने की धमकी
ठगों ने तारावती को किसी से बातचीत नहीं करने की चेतावनी दी। कहा कि जानकारी लीक होने पर उन्हें तत्काल जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद दबाव बनाकर सिक्योरिटी सुपरविजन अकाउंट खुलवाया गया और बैंक खातों व एफडी से जुड़े दस्तावेज मंगवाए गए। डर के कारण तारावती ने मांगी गई जानकारी साझा कर दी।
इसके बाद ठगों ने एफडी तुड़वाकर रकम बताए गए खातों में भेजने के लिए कहा। तारावती ने पहले 25 लाख रुपये आंध्र प्रदेश के एक खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद 30 सितंबर को 14 लाख और एक अक्तूबर को महाराष्ट्र के एक बैंक खाते में 13 लाख रुपये भेजे। बाद में आरोपियों से संपर्क करने पर फोन बंद मिला। तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि फोन नंबर और बैंक खातों की जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।