लखनऊ। साइबर ठग ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर इंदिरानगर निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी आदेश कुमार सिंह को आठ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 95.65 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी ने उन्हें फिरौती के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी थी। पीड़ित ने 26 अक्तूबर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई।
आदेश के मुताबिक, 17 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ईडी अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से मुंबई में सिम कार्ड खरीदा गया है, जिसका इस्तेमाल फिरौती मांगने में किया जा रहा है। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए एनओसी लेने की बात कही। कुछ देर बाद उसी नंबर से वीडियो कॉल की गई, जिसमें एक युवक पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया।
व्हाट्सएप पर भेजा वारंट, एफडी तुड़वाकर ऐंठी रकम
आरोप है कि ठग ने व्हाट्सएप पर आदेश के नाम का गिरफ्तारी वारंट भेजकर पूछताछ में सहयोग करने के लिए कहा। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा गया। 19 सितंबर को आरोपी ने जांच के नाम पर उनकी जमा पूंजी अपने खातों में ट्रांसफर करने के लिए कहा। दबाव बनाकर एफडी भी तुड़वा दी गई। 19 से 24 सितंबर के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 95.65 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
और रकम मांगने पर हुआ संदेह
आदेश के मुताबिक 24 सितंबर को आरोपी ने अतिरिक्त रकम की मांग की तो उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने कॉल काटकर इंदिरानगर स्थित इंडियन बैंक शाखा पहुंचकर रकम होल्ड कराने का प्रयास किया लेकिन तब तक आरोपी रुपये निकाल चुके थे। आरोप है कि ठगी का साथी अभी भी उन्हें कॉल कर अपना नाम ईडी इंस्पेक्टर विजय खन्ना बता रहा है। वह लगातार रकम की मांग कर रहा है। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की।
इंस्पेक्टर आलोक राय ने बताया कि पीड़ित को जिन नंबरों से कॉल की गई, उन्हें ट्रेस किया जा रहा है। संबंधित बैंकों से भी संपर्क किया गया है।
डिजिटल अरेस्ट से ऐसे बचें
एडीसीपी क्राइम किरण यादव के मुताबिक, कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। अनजान नंबर से पुलिस, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर कॉल करने वाला धमकी दे तो कॉल काट दें और तत्काल परिवार व पुलिस को सूचना दें। साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करना जरूरी है।