प्रदेश में एक मंत्री के बेटे का टिकट काटकर एक विधायक को दे दिया गया।
तभी से मंत्री पुत्र एक प्रमुख राष्ट्रीय दल से टिकट के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। मुश्किल मंत्रीजी की कुर्सी को लेकर फंस गई है।
मंत्रीजी बेटे को समझा रहे हैं कि चुनाव न लड़ने पर पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजेगी, तो बेटा समझा रहा है कि चुनाव न लड़ने से इलाकाई सियासत चौपट हो जाएगी।
हकीकत यह है कि टिकट कटने के फैसले को बेटा हजम नहीं कर पा रहा है। दिलचस्प है कि मंत्री की इच्छा की परवाह किए बगैर बेटे की तरफदारी में मां भी उतर आई हैं।
बेटा जिस दल से टिकट मांग रहा है, उस दल के वरिष्ठ नेताओं से मां के अच्छे संबंध हैं। मां ने बेटे के लिए अपने प्रभाव का खुलकर इस्तेमाल शुरू कर दिया है, मगर मंत्रीजी भी अड़े हुए हैं कि वह दल नहीं छोड़ेंगे।
उधर मंत्री पुत्र जिस पार्टी से टिकट मांग रहे हैं, वहां से मंत्री के इस्तीफे के बिना टिकट देने से माहौल न बनने की बात कही जा रही है।
ऐसे में मामला उलझ गया है। हालांकि इस दांवपेंच ने न सिर्फ एक प्रभावशाली घराने के सियासी कलह को सतह पर ला दिया है बल्कि इसके संभावित नतीजे से कई लोगों की नींद उड़ गई है।