उजाला योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता बताते हुए समाजसेवी सुन्दर लाल टंडन ने एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे बिजली आपूर्ति के घंटो में वृद्धि हुई है। वहीं, प्रदेश में बिजली को लेकर होने वाले आंदोलनों पर भी विराम लग गया है। छात्रा दीपा वर्मा ने कहा, विद्युत बिलों में भी इस योजना से बचत ही बचत हो रही है,पहले एक बल्ब से एक ही कमरे में उजाला होता था तो अब वही उतनी ही बिजली से दस कमरों में उजाला होने लगा है।
कपडा व्यवसाई मंजीत सिंह ने कहा कि उजाला योजना की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि बाजार में अब सिर्फ एल ई डी बल्ब ही मिलने लगे है। उपभोक्ता संजय शुक्ल ने बताया कि बिजली की बचत से ट्रांसफॉर्मर, विद्युत् तारो के जर्जर होने के क्रम में भी गिरावट आई है।
प्रधानमंत्री की इस योजना की सफलता में प्रदेश सरकार का भी पूर्ण योगदान है। वहीं, व्यवसाई कल्याण सिंह कहते है कि बिजली की खपत में निश्चित रूप से कटौती हुई है। मगर बिजली की दरों में हुई बढ़ोत्तरी से विद्युत उपभोक्ताओं को आपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।