पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
इससे न तो कालेधन का पता चला है और न ही नकली करेंसी का हिसाब मिला है। न तो भ्रष्टाचार रूका और न ही आतंकवादियों की गतिविधियों में कमी आई है।
अखिलेश ने शुक्रवार को यहां कहा कि नोटबंदी का निर्णय भी अब संदेह के घेरे में है। कृषि पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है।
चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर मात्र 2.3 प्रतिशत रही जो गत वर्ष की चौथी तिमाही में 5.2 फीसदी थी। मंहगाई अनियंत्रित है।
खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों के दामों में तेजी आई है। व्यापार में मंदी है। छोटे उद्योगधंधे चौपट हो गए है।
निर्माण कार्य ठप होने से फ्लैट और मकान खरीदना कठिन हो गया है। नोटबंदी से अमीरों का कुछ नहीं बिगड़ा है, गरीबों की जरूर शामत आ गई है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से विकास कार्यों को बहुत क्षति पहुंची है। उद्योगधंधो का विस्तार रूका है। खनन क्षेत्र में कमी आई है। निर्माण सामग्री महंगी होने से आवासीय निर्माण में भारी गिरावट आई है।
विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्यवर्धन (जीएसटी) भारी गिरावट के साथ 1.2 प्रतिशत रह गया है। नोटबंदी ने आम जनता का जीवन दूभर कर दिया हैं।
उन्होंने कहा कि देश के तमाम अर्थशास्त्रियों ने भी नोटबंदी और जीएसटी की उपयोगिता पर शंका जताते हुए स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
नोटबंदी के कारण जीडीपी की वृद्धि दर चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ गई है। तीन साल में यह सबसे निचला स्तर है।
खुद रिजर्व बैंक ने माना है कि नोटबंदी से चलन से हटाए गए करीब 99 प्रतिशत नोट बैंक में वापस लौटे हैं। काला धन और फर्जी नोट कहां है, पता नहीं चला।