वाजपेयी अंतिम बार 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के समर्थन में लखनऊ में सभा करने आए थे। स्वास्थ्य ठीक न होने से इसके बाद वे नहीं आ पाए। 2009 में उनकी जगह लोकसभा चुनाव लालजी टंडन लड़े थे।
टंडन अपनी चुनावी नैया पार लगाने के लिए अटल की खड़ाऊं (पादुका) लेकर आए। बाद में उनके लिए अटलजी की चिट्ठी भी आई और वह अटल की खड़ाऊं और चिट्ठी के सहारे चुनाव लड़े। अटल की चिट्ठियां घर-घर पहुंचाई गई। टंडन चुनाव जीत गए।
वर्ष 2014 में राजनाथ सिंह लखनऊ के चुनावी मैदान में उतरे तो उनके लिए वाजपेयी ने अंगवस्त्रम भेजा। जिसे गले में डालकर राजनाथ ने न सिर्फ नामांकन किया, बल्कि चुनाव प्रचार भी किया। साफ है कि लखनऊ में भाजपा उम्मीदवारों की चुनावी नैया अटल के नाम के सहारे ही पार लगती रही है।