प्रदेश में विद्यार्थियों की फीस की भरपाई में भारी अनियमितता सामने आई है। जिला स्तर के अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों की मिलीभगत से एक ही संस्थान में एक ही पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के खातों में अलग-अलग धनराशि भेज दी गई।
शिकायत मिलने पर मुख्य सचिव ने इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए निदेशक (समाज कल्याण) की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच का फैसला भी किया गया है।
शासन को शिकायत मिली थी कि एक ही संस्थान में एक ही पाठ्यक्रम के लिए सामान्य, पिछड़े, अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को शुल्क की प्रतिपूर्ति अलग-अलग की जा रही है।
जबकि शुल्क निर्धारित करने वाली ‘प्रवेश और फीस नियमन समिति’ फीस तय करने में जाति या वर्ग को आधार नहीं बनाती।
सामान्य और अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शुल्क की प्रतिपूर्ति करता है।