जल निगम भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सपा नेता आजम खां के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया है। ईडी ने जल निगम भर्ती घोटाले की जांच शुरू करने के साथ ही निगम प्रशासन से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। हाल ही में जेल से रिहा हुए आजम के खिलाफ ईडी के लखनऊ जोन ने एसआईटी की चार्जशीट के आधार पर यह नया मुकदमा दर्ज किया है।
ईडी द्वारा नया केस दर्ज करने से आजम की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज करने के बाद ईडी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस क्रम में ईडी ने जल निगम प्रबंधन से भर्ती प्रक्रिया के दौरान जल निगम में प्रमुख पदों पर तैनात रहे अफसरों की जानकारी मांगी है। दरअसल, नगर विकास मंत्री होने के साथ आजम जल निगम के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते ही जल निगम में भर्ती को मंजूरी दी थी। लेकिन एसआईटी की जांच टीम ने जब पूछताछ की थी तो उन्होंने भर्ती घोटाले के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए खुद को निर्दोष बताया था। हालांकि एसआईटी ने जांच में आजम और जल निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पीके आसुदानी को दोषी ठहराते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है।
कई मामलों में पहले ही जांच कर रही है ईडी
ईडी पहले से ही आजम के खिलाफ जौहर विश्वविद्यालय, शत्रु संपत्तियों और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने के मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में आजम के खिलाफ 2019 में ही मुकदमा दर्ज हुआ था। अब जल निगम में भर्ती घोटाले का एक और नया मामला जुड़ गया है।
ये है मामला
सपा शासन में जल निगम में सहायक अभियंता, अवर अभियंता और लिपिकों के करीब 1342 पदों पर भर्ती हुई थी। लेकिन अधिक नंबर पाने के बाद भी कम नबंर वाले अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। इस पर ज्यादा नंबर पाने के बावजूद चयन से वंचित अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया था। वर्ष 2016 में यह मामला सामने आया तो हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने अभ्यर्थियों की शिकायत की जांच एसआईटी को सौंप दी थी। एसआईटी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद शासन ने आजम एवं अन्य अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए थे। विवेचना के बाद एसआईटी ने सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की है।