आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने छात्रवृत्ति घोटाले में एक और मुकदमा दर्ज करते हुए 23 अधिकारियों को नामजद किया है। उन्नाव के बांगरमऊ ब्लाक के 33 स्कूलों में 2001 से 2010 के बीच हुए साढ़े आठ लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में यह मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस अवधि में उन्नाव जिले में रहे 11 जिला समाज कल्याण अधिकारी, 2 जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी और 10 क्लर्क को नामजद किया गया है।
यह पूरा घोटाला 2001 से 2010 के बीच का है। छात्रवृत्ति में घपले की शासन को मिली शिकायत के आधार पर 33 स्कूलों की रेंडम जांच की गई जहां 8 लाख 56 हजार 580 रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई।
यह छात्रवृत्ति समाज कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से छात्रों को वितरित करने के लिए दी गई थी, जिसका विभाग के अधिकारी, स्कूल प्रबंधन, ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, ग्राम विकास अधिकारी और सभासद ने मिलकर बंदबांट कर लिया।
लखनऊ सेक्टर के उप निरीक्षक लक्ष्मी नारायण गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में 2001 से 2010 के बीच उन्नाव में तैनात रहे जिला समाज कल्याण अधिकारियों को नामजद किया गया है।
इसमें सरोज प्रसाद, हरि राज राम, वीके सिंह, एनएन द्विवेदी, एनपी सिंह, यादवेंद्र सिंह, सिंह प्रताप देव, एमएल कन्नौजिया, एसजे फारूकी, उषा रानी जायसवाल और राकेश रमन का नाम शामिल है। इसके अलावा इसी अवधि में तैनात रहे दो जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी वीसी श्रीवास्तव और यादवेंद्र सिंह, 10 तत्कालीन क्लर्क शैलेंद्र श्रीवास्त, देवी दयाल यादव, लाल सिंह, अनिल कुमार, शिशुपाल सिंह, संजय बनौधा, संतोष कुमार, चंद्र भूषण मिश्रा, वीसी श्रीवास्तव, सुखेंद्र सिंह और रमेश चंद्र मिश्रा को नामजद किया है। इसकेअलावा अन्य लोगों में स्कूलों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य, स्कूल के सहखातेदार ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव, समाज कल्याण विभाग और पिछड़ा कल्याण विभाग के अन्य क्लर्क को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू के महानिदेशक राजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि उन्नाव जिले के 18 ब्लॉक में से 10 की जांच पूरी हो चुकी है। इन मामलों में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति शासन से मांगी गई थी। इसमें से एक मामले में शासन ने अनुमति दी है जिसके बाद यह मुकदमा दर्ज किया गया है। बाकी मामलों में जैसे जैसे अनुमति मिलेगी, मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 8 ब्लॉक की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा लगभग पूरी कर ली गई है, जिसमें एफआईआर के लिए जल्द ही शासन से अनुमति मांगी जाएगी।