वीमेन पावर लाइन 1090 को अपग्रेड कर इसे और ज्यादा सुविधाजनक बना दिया गया है। सहायता पाने के लिए शिकायत करने वाली युवतियों को बस अपना फोन नंबर छोड़ना होगा, इसके बाद पावर लाइन की टीम खुद पीड़िता से संपर्क करेगी और मदद मुहैया कराएगी।
आईजी वीमेन पावर लाइन नवनीत सिकेरा ने यह जानकारी आईआईएम-एल में आयोजित विश्व प्रबंधन सम्मेलन में शनिवार को दी। उन्होंने बताया कि पावर लाइन के पांच साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस सुविधा की शुरुआत एक जनवरी 2018 से की जाएगी।
आईजी ने बताया कि हर रोज औसतन 10 हजार शिकायतें 1090 में दर्ज की जा रही हैं। यहां 110 महिला पुलिस कर्मी कॉल अटैंड करती हैं। यानी हर स्टाफ रोजना 90 से अधिक फोन कॉल सुन रहा है। सिकेरा ने बताया कि कॉल के साथ-साथ अन्य माध्यमों से शिकायत दर्ज की जा सके, इसके लिए सुविधा का विस्तार किया जा रहा है।
एक जनवरी से ऐसे मांगें मदद
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नई सुविधा के तहत 1090 पावर लाइन पर अपना नंबर देने के लिए परेशानी में पड़ीं महिलाएं और लड़कियां वॉट्स एप, 1090 की आधिकारिक वेबसाइट और लैंड लाइन नंबरों पर मिस्ड कॉल के जरिए अपना नंबर छोड़ सकेंगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पावर लाइन खुद इन लड़कियों से बाद में संपर्क करेगा और मदद मुहैया करवाएगा।
लड़कियों के लिए 83 फीसदी लड़के सीट छोड़ रहे
अनौपचारिक बातचीत में नवनीत सिकेरा ने बताया कि 1090 ने लखनऊ में लड़कियों के साथ हो रहे व्यवहार पर एक सर्वे किया है। जल्द ही रिपोर्ट जारी की जाएगी। कई रोचक तथ्य सामने आए हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया है लखनऊ मेट्रो में सफर करने के दौरान 83 प्रतिशत लड़के जगह न होने पर लड़कियों के लिए अपनी सीट छोड़ देते हैं। यह अध्ययन छिपे कैमरों से विभिन्न जगहों की रिकॉर्डिंग के आधार पर किया गया है।
छेड़छाड़ के मामलों में 68 फीसदी आरोपी बुजुर्ग
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पहले भी और अब ताजा आंकड़ों से भी यह सामने आया है कि लड़कों के बजाय बड़ी उम्र के पुरुष लड़कियों और महिलाओं को ज्यादा परेशान कर रहे हैं। नवनीत सिकेरा ने बताया कि 1090 पावर लाइन ने अब तक करीब 8.28 लाख शिकायतें दर्ज कीं हैं। इनमें करीब 8.18 लाख शिकायतों का समाधान लड़कियों को परेशान करने वाले लड़कों को पुलिस का फोन जाने के साथ ही हो गया। जो नहीं माने ऐसे 7,156 लोगों को परिवार सहित पावर लाइन ऑफिस बुलाया गया और माफीनामा लिखवाया गया। वे इसके बाद सुधर गए। 712 मामले या कहें शिकायतों के 0.01 प्रतिशत में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। उन्हाेंने बताया कि इन मामलों में से 68 प्रतिशत में दोषी लोग 50 वर्ष से अधिक उम्र के थे। यह दर्शाता है कि सभी लड़कों को ईव-टीजर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।