दरअसल आबकारी विभाग की नई पॉलिसी शराब कारोबार से जुड़े पुराने मठाधीशों के गले नहीं उतर रही है। इस ई-लॉटरी में खेल करने की कोशिश की गई। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पांच सितारा होटलों में शराब की दुकान लेने के इच्छुक लोगों के इंटरव्यू लिए गए और उनके हैसियत प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज जमा कराए गए। दावा यहां तक किया जा रहा है कि शराब के पुराने सिंडीकेट की मिलीभगत से ही यह पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
26 हजार दुकानों के लिए होनी थी ई-लॉटरी
पहले चरण में कुल 26,005 दुकानों के लिए ई-लॉटरी होनी थी। इसके लिए पूरे प्रदेश से 3 लाख 67 हजार 419 लोगों ने आवेदन किया था। 2 लाख 44 हजार 737 लोगों ने ही हिस्सा लेने के लिए फीस जमा की। आवेदनों की स्क्रूटनी की गई तो लगभग 11 हजार आवेदक बाहर हो गए। कुल 2 लाख 33 हजार 892 आवेदक के दस्तावेज दुरुस्त पाए गए जिन्हें इसमें शामिल किया गया।