आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन जल्द ही खत्म हो सकता है। शासन का कहना है कि नागपाल को दी गयी चार्जशीट का जवाब मिल गया है और इसका परीक्षण किया जा रहा है।
परीक्षण में तीन-चार दिन का समय लगेगा। शासन अब इस मामले का पूरी तरह से पटाक्षेप करना चाहता है। लिहाजा जल्द ही कुछ शर्तों के साथ नागपाल की बहाली हो सकती है। फिलहाल इस मामले को शांत होता देख और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सरकार अब इसे और ज्यादा तूल नहीं देना चाहती है।
शासन का कहना है कि दुर्गाशक्ति का जवाब मिल गया है और इसका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकेगा है।
शासन का यह भी दावा है कि नागपाल का निलंबन इंटलीजेंस की रिपोर्ट पर किया गया। चार्जशीट का जवाब देने की समय सीमा मंगलवार को खत्म हो रही थी इसलिए उन्होंने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को अपना जवाब डाक से भेजा है।
सूत्रों के मुताबिक नागपाल ने पांच पन्नों में अपना जवाब दिया है। इसमें उन्होंने मामले से संबंधित तथ्यों का उल्लेख करते हुए खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताया है।
अब शासन भी नागपाल को राहत देने के मूड में है। क्योंकि नागपाल की बहाली या निलंबन जारी रखने की स्थिति से शासन को उनके जवाब से केंद्र को भी अवगत कराना होगा।
सूत्रों का कहना है कि मामले का पटाक्षेप करने के लिए कुछ शर्तों के साथ उन्हें बहाल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि पिछले महीने सरकार ने 2010 बैच की आईएएस अफसर और गौतमबुद्धनगर के सदर तहसील की एसडीएम दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित कर दिया था।
नागपाल पर आरोप था कि उन्होंने एक धार्मिक स्थल की दीवार को गिरवाया है। हालांकि नागपाल ने वहां पर अवैध खनन को रोकने केलिए बड़ी कार्रवाई की थी। जिसकेकारण खनन माफिया उनके खिलाफ थे।
क्या कहते हैं प्रमुख सचिव....
प्रमुख सचिव कार्मिक और नियुक्ति राजीव कुमार ने माना कि निलंबित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल का जवाब मिल गया है।
उन्होंने कहा कि इसका परीक्षण कराने के बाद ही इस बारे में कोई टिप्पणी की जा सकती है। इस मामले में उन्होंने ज्यादा बात करने से मना कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से गदगद है यूपी सरकार...
पिछले शुक्रवार को दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से प्रदेश सरकार गदगद है।
सरकार का मानना है कि शुक्रवार के दोपहर तक स्थिति पूरी तरह से उसके पक्ष में हो गयी थी। लिहाजा अब इस मामले में कुछ भी कहना ठीक नहीं है। सरकार की तरफ जो दलीलें दी गयी थी, उससे कोर्ट भी संतुष्ट था।
बहाल ना होने की स्थिति में क्या हो सकते हैं विकल्प...
हालांकि इसकी उम्मीद कम ही है। फिर भी दूसरी स्थिति ये भी हो सकती है कि अगर शासन उनके जवाब से संतुष्ट न हुआ, तो वह फिर से चार्जशीट देकर इसकी जांच करा सकता है।
इसके लिए किसी सचिव और आयुक्त स्तर यानी नागपाल से दो पद वरिष्ठ अफसर को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त कर सकता है। जांच अधिकारी नागपाल को तलब कर उनसे जवाब मांग सकता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा समय लगेगा।
इसके अलावा केंद्र के90 दिन केबाद किसी अखिल भारतीय सेवा के अफसर का निलंबन वापस लेने के अधिकार का भी समय करीब आ जाएगा। ऐसे में सरकार इस मामले को ज्यादा लटकाकर अपने खिलाफ फिर से माहौल नहीं बनाएगी।