निलंबित आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल केमुद्दे पर चौतरफा घिरी सरकार पर
केन्द्र का दबाव बढ़ता जा रहा है।
लड़ाई अब केन्द्र और राज्य की तरफ मुड़ गई है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार कोई बीच का रास्ता निकालकर
उन्हें राहत देगी। सरकार एक नोटिस देकर उन्हें भविष्य में इस तरह के कदम न
उठाने की चेतावनी देकर निलंबन वापस ले सकती है।
शनिवार
को दिनभर नागपाल को लेकर राजधानी में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। कभी जांच
कमेटी के गठन की अफवाह उड़ी तो कभी मुख्यमंत्री से मुलाकात की लेकिन ऐसा
कुछ नहीं हुआ।
अफवाहों का गुब्बारा शाम होते- होते फुस्स हो गया। शुक्रवार
को मुख्य सचिव से मिलकर नागपाल ने अपना प्रत्यावेदन दिया। उनका कहना था कि
उन्हें जिलाधिकारी ने आदेश दिया था और उन्हीं केआदेश का पालन करते हुए वह
कादलपुर गांव गई थीं।
वहां पर जो भी निर्माण कार्य हो रहा था, वह वहां की
स्थानीय जनता ने गिराया। इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी। वहां पर किसी भी
तरह का धार्मिक स्थल नहीं था और न ऐसे किसी निर्माण को गिराया गया।
उधर,
शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय ने नागपाल मुद्दे पर प्रदेश
सरकार से रिपोर्ट देने को कहा है।
केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय के
राज्यमंत्री नारायण सामी पहले ही राज्य सरकार से रिपोर्ट मांग चुके हैं
लेकिन उसने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है।
केन्द्र का दबाव और बढ़ने की
संभावना के मद्देनजर राज्य सरकार बीच का रास्ता निकाल नागपाल को बहाल कर
सकती है।