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दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन वापस

Sun, 22 Sep 2013 09:27 PM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
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दुर्गा की खामोशी आखिरकार रंग ले आई है। रविवार शाम यूपी सरकार ने दुर्गा का निलंबन वापस ले लिया है।
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दुर्गाशक्ति के निलंबन के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक तूफान उठा। राजनीतिक दलों ने इसे मुद्दा बनाया तो आईएएस एसोसिएशन ने भी अपने तरीके से इस पर ऐतराज जताया।
इसके बावजूद, दुर्गाशक्ति ने संयम बरतते हुए पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखी। उनका यह मौन ही उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इसी का नतीजा है कि रविवार शाम राज्य सरकार ने उनका निलंबन वापस ले लिया।
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यूपी सरकार ने एक लाइन की विज्ञप्ति जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी है। इसके अलावा, सरकार की ओर से कोई पक्ष नहीं रखा गया है। न ही कोई सफाई दी गईहै।

यह भी खबर मिल रही है कि दुर्गाशक्ति को अभी कोई तैनाती नहीं दी गई है। अगले फैसले तक उन्हें प्रतीक्षा सूची में ही रखा जाएगा।

गौरतलब है कि गौतमबुद्धनगर में तैनाती के दौरान एक मस्जिद की दीवार गिरवाने के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। हालांकि उनके निलंबन की वजह खनन माफिया पर सख्ती को माना जा रहा था। दुर्गा ने शनिवार को मुख्यमंत्री से मिलकर सफाई पेश की थी।

गौतमबुद्ध नगर की एक मस्जिद की दीवार गिराए जाने से जुड़े विवाद में दुर्गाशक्ति को 27 जुलाई की रात निलंबित कर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया था। दुर्गा उस दौरान वहां अवैध खनन के खिलाफ जोरदार अभियान को लेकर चर्चा में थीं।

आम लोगों में संदेश गया कि खनन माफियाओं के दबाव में दुर्गा निलंबित की गईं। दुर्गा के निलंबन का मामला आईएएस एसोसिएशन ने यहां उठाया तो केंद्रीय एसोसिएशन ने पीएमओ तक पैरवी की।

निष्पक्ष कार्यवाही के लिए बयान संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी आया और मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक पहुंचा। मगर दुर्गा के खुद सामने न आने की वजह उन्हें इस तरीके से किसी स्तर पर राहत नहीं मिल पाई। बाद में शासन ने मस्जिद गिराए जाने में दुर्गा की भूमिका को लेकर आरोप पत्र दे दिया।

दुर्गा ने आरोप पत्र का जवाब दिया लेकिन वह शासन को संतुष्ट नहीं कर पाईं। दुर्गा के जवाब से असंतुष्ट शासन ने प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को जांच सौंपी थी। वह नोएडा जाकर जांच पूरी कर चुके हैं।

शुक्रवार को विधानसभा में भी यह मामला उठा था। सरकार की ओर से वहां बताया गया कि दुर्गा के निलंबन को खनन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए बल्कि उन्हें मस्जिद की दीवार गिराने की वजह से निलंबित किया गया है। मामले की जांच चल रही है।
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इस बीच शनिवार को दुर्गाशक्ति नागपाल अपने पति अभिषेक सिंह के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनके सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर मिली थीं।

बताया गया कि उन्होंने प्रकरण में मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा और पूरे घटनाक्रम पर खेद जताया था। मुख्यमंत्री ने उन्हें निष्पक्ष कार्यवाही के लिए आश्वस्त किया था। दुर्गा से मुख्यमंत्री की मुलाकात के बाद ही शासन ने जल्द बहाली का संकेत दे दिया था।

रविवार उन्हें बहाल कर दिया गया। हालांकि, नई तैनाती अभी नहीं दी गई है। इसी के साथ डेढ़ महीने से अधिक समय तक चले इस निलंबन प्रकरण का पटाक्षेप हो गया।
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