केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की मरम्मत के कारण 300 से अधिक मरीजों के ऑपरेशन ठप पड़े हैं। एक पखवारे से अधिक समय बीत चुका है लेकिन ओटी को शुरू नहीं किया जा सका है।
ओपीडी में आने वाले मरीजो को सिर्फ आगे की तारीख देकर भेजा जा रहा है। हालत ये है कि लिम्ब सेंटर में स्थित हड्डी रोग विभाग के हमेशा भरे रहने वार्डों में आधे ही मरीज बचे हैं।
लिम्ब सेंटर में चल रहे केजीएमयू के आर्थोपैडिक विभाग में सर्जरी के लिए मरीजों की वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है। ऑपरेशन थिएटर की एक पखवारे से अधिक समय से चल रही मरम्मत के चलते ये स्थिति आयी है।
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की सर्जरी ट्रॉमा सेंटर में की जा रही है लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों को आगे की डेट दी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के अधिकारियों और केजीएमयू प्रशासन की गलती से ये स्थिति पैदा हुई है।
लिम्ब सेंटर में आर्थोपैडिक विभाग के पास थर्ड फ्लोर पर दो सामान्य ओटी और एक मॉड्यूलर ओटी है। तीनों ओटी में एक दिन में सामान्यत: छह से सात ऑपरेशन होते थे। एक साथ तीनों ओटी में मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया।
इससे ‘इलेक्टिव ऑपरेशन’ पूरी तरह से ठप हो गए। ये स्थिति 20 दिन से भी अधिक समय से बनी हुई है। ओटी बंद होने के चलते अब तक 300 से अधिक मरीज ऑपरेशन की कतार में हैं।
विभाग के चिकित्सकों की मानें तो आर्थोपैडिक विभाग में 15 जनवरी के बाद ही ऑपरेशन शुरू हो सकेंगे। तब तक ऑपरेशन थिएटर बनकर तैयार हो जाएगा। इसी बीच ओटी को विसंक्रमित करने का काम भी होना है।
जिससे ऑपरेशन के दौरान किसी तरह का बाहरी संक्रमण मरीज को न हो सके। इसके अलावा थिएटर का कल्चर सेंसटिविटी टेस्ट भी होगा। ये टेस्ट ओटी में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया की स्थिति बताता है।
ट्रॉमा सेंटर की ओटी पर बढ़ा लोड
इनडोर ओटी बंद होने के कारण ट्रॉमा सेंटर के थिएटर पर लोड बढ़ गया है। ट्रॉमा में आर्थोपैडिक विभाग की दो ओटी हैं। दुर्घटना में घायल होकर आने वाले मरीजों का आमतौर पर वहां ऑपरेशन किया जाता है।
इनमें से एक ओटी इन्फेक्टेड (संक्रमित) हो जाती है तो दूसरी ओटी में गंभीर मरीजों के ऑपरेशन चलते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ट्रॉमा में एक दिन में 6 से 7 सर्जरी होती हैं।
ऐसे में ओपीडी से भर्ती हुए मरीजों के ऑपरेशन ट्रॉमा सेंटर में करने से दिक्कतें पैदा हो जाती हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ऐसे मरीजों के आने से होती है जिनके गैंगरीन के कारण एम्पुटेशन (अंग काटना) होता है।
ऐसे मरीज के आने के बाद बिना ओटी की सफाई के दूसरा केस करना मुश्किल हो जाताहै।