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रिपोर्ट में खुलासा: रात के हादसों में हर दूसरा चालक पीकर था टुन्न, हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाने से भी गई जान

Mon, 23 Feb 2026 08:39 AM IST
भूपेन्द्र सिंह सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लखनऊ स्थित पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में छह वर्ष के दौरान आए घायलों के आधार पर रिपोर्ट जारी हुई है। इसमें बताया गया कि सिर्फ एक तिहाई ने हेलमेट लगाया था। चार पहिया में सीट बेल्ट लगाने वाले भी सिर्फ 41 फीसदी मिले। हर दूसरा चालक पीकर था टुन्न था। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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road accident (Demo) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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शराब पीकर गाड़ी चलाना और हेलमेट इस्तेमाल न करना रात में दुर्घटना की बड़ी वजह हैं। राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में आए घायलों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें देखा गया कि रात के समय लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे ने शराब पी रखी थी और सिर्फ एक तिहाई ने ही हेलमेट पहना था। वहीं, चार पहिया में सीट बेल्ट लगाने वाले भी सिर्फ 41 फीसदी थे।

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डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा की यह रिपोर्ट क्यूरस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार घायलों के कुल मामलों में से 67.3 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित थे, जिनमें 84.7 फीसदी दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3 फीसदी मरीज पुरुष थे और उनकी औसत आयु 37.5 वर्ष थी। सबसे ज्यादा 44.5 फीसदी मामले सिर की चोट के थे।

बाथरूम में गिर रहे बुजुर्ग

अध्ययन में यह भी देखा गया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में गिरकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बाथरूम में लगे चिकने टाइल्स हैं जिनकी फिसलन के शिकार बुजुर्ग हो जाते हैं।

चार फीसदी की हुई मौत

अध्ययन में पाया गया कि 58.4 फीसदी मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और 45.8 फीसदी को मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता हुई। कुल मृत्यु दर चार फीसदी रही, जिसमें 42.2 फीसदी मौतें भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हुईं।

रफ्तार बन रही दुर्घटना की वजह

केजीएमयू में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के मुताबिक, दुर्घटनाओं के लिए रफ्तार एक बड़ी वजह है। नए बन रहे एक्सप्रेसवे और बेहतर होते रास्ते एक से दूसरे स्थान पर जाने में हमारा समय बचाते हैं, लेकिन दुर्घटना की वजह भी बन रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में सबसे बड़ी वजह लापरवाही और जागरूकता की कमी है। हमें रफ्तार के साथ ही दुर्घटनाओं के प्रति सावधान रहने की भी जरूरत है। जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर का निर्माण भी होना चाहिए। इससे जनहानि को कम किया जा सकेगा।

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