नेपाल से तस्करी कर यूपी के विभिन्न जिलों में मादक पदार्थों की खेप पहुंचाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को एसटीएफ ने सोमवार को कानपुर में बंदी बना लिया। पकड़े गए लोगों में एक रोडवेज बस का चालक है। इनके पास से 14 किलोग्राम चरस बरामद हुई जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत एक करोड़ 40 लाख रुपये है।
एसटीएफ अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों व मादक पदार्थों के खरीदारों को चिन्हित करने की कवायद में जुट गई है। एसटीएफ पूर्व में भी नेपाल सीमा से होने वाली चरस तस्करी का रैकेट चलाने वाले कुछ लोगों को पकड़ चुकी है।
इसी क्रम में जांच एज़ेंसी को सूचना मिली थी कि तस्करों ने अब नया पैंतरा अपनाया है और रोडवेज बस में मादक पदार्थ भेजा जा रहा है। इस काम में रोडवेज कर्मियों का सहयोग लिया जा रहा है।
इन तस्करों की धरपकड़ की कोशिश में एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक एस आनंद को जानकारी मिली कि नेपाल के तस्करों के साथ सिद्धार्थनगर डिपो की बस यूपी-53/बीटी-3785 के चालक संजय तिवारी की मिलीभगत है। इस पर एसटीएफ की टीम ने सरकारी बस अड्डे पर इस बस की निगरानी शुरू की। जैसे ही बस वहां पहुंची एक व्यक्ति वहां आया और चालक से बात करने लगा।
प्रति चक्कर मिलते थे दो हजार रुपये
एसटीएफ को पता चला कि जो व्यक्ति बस चालक से बात कर रहा है वह तस्करों का वही साथी है जिसने चालक को नेपाल सीमा में चरस रखे हुए डिब्बे दिए थे।
यह चरस लाउडस्पीकर, स्टेबलाइजर आदि के डिब्बों में थी। एसटीएफ ने जब पकड़े गए नेपाल नागरिक इकबाल से पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि वह चरस की तस्करी में कई सालों से लगा है।
ऐसे लाते थे चरस
इकबाल ने पूछताछ में कबूला कि वह पिछले दो वर्षों से चरस की तस्करी में लिप्त है तथा मुजफ्फरनगर के तौहीद नामक व्यक्ति को चरस देता है। सीमा क्षेत्रों में एसटीएफ द्वारा की गयी गिरफ्तारियों के कारण उसने बस यूपी-53/बीटी-3785 के चालक संजय तिवारी से सम्पर्क करके कानपुर तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा।
इस पर संजय तैयार हो गया। संजय को प्रति चक्कर दो हजार रुपये दिए जाते थे। यदि चरस की मात्रा अधिक हो तो पांच हजार भी दिए जाते थे।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इकबाल ने बताया कि इसके पहले वह 2005 में गोरखपुर में तीन किलोग्राम चरस के साथ पकड़ा गया था और पांच वर्ष जेल में रहा। तबसे अब तक वह पांच-छह बार माल भेज चुका था।
बस में तस्करी का माल वह सिद्धार्थनगर के भारत नेपाल सीमा स्थित बढ़नी में चढ़ा देता था और खुद ट्रेन द्वारा कानपुर पहुंच जाता था। बस के कानपुर पहुंचने पर वह संजय तिवारी से चरस लेकर बस या ट्रेन से मेरठ जाता था। वहां से कैराना जाता था जहां उससे तौहीद नामक व्यक्ति माल लेता था। उक्त चरस वह कृष्णानगर के विष्णु नामक व्यक्ति से लेता था।
संजय तिवारी ने पूछताछ में बताया कि 2008 से वह संविदा पर रोडवेज बस में चालक है। लगभग एक साल पहले वह इकबाल से बढ़नी में मिला था और विगत तीन चार महीने से वह इकबाल द्वारा दिया गया चरस बस में रखकर कानपुर ले जाता था और वहां इकबाल को दे देता था।