सांस्कृतिक आयोजनों, उत्सवों और शादियों में वीडियोग्राफी के लिए ड्रोन तकनीक अब पहली पसंद बन चुकी है। इसके अलावा सर्वे, विभागीय निगरानी, वैज्ञानिक अनुसंधान, आपदा प्रबंधन के अलावा कृषि कार्य में भी इसकी उपयोगिता बढ़ रही है। विभिन्न क्षेत्रों में मांग के चलते ड्रोन की मांग में भी इजाफा हो रहा है। राजधानी की बात करें तो हर साल करीब 500 ड्रोन की खरीदारी हो रही है।
ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ने से इसकी मरम्मत के काम में भी तेजी आई है। नाका हिंडोला में ड्रोन और वीडियो कैमरे की मरम्मत करने वाले सिद्दीकी ने बताया कि बाजार में हर साल 150 से 200 ड्रोन मरम्मत के लिए आते हैं। शादी के सीजन में इनकी संख्या ज्यादा रहती है। रवि गुप्ता ने बताया कि ड्रोन की मरम्मत का खर्च दो हजार रुपये से शुरू होता है, जो 20 हजार रुपये तक जाता है।
बाजार में 30 हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक के ड्रोन हैं। कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन की डिजाइन सामान्य से अलग होती है। यह ड्रोन 25 किलो तक वजन भी उठा सकता है। राजधानी के आसपास के जिलों के साथ पूर्वांचल के किसान कृषि कार्य में इस ड्रोन का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इस ड्रोन की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये है।