प्रदेश सरकार 20 और जिलों में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाने जा रही है। ये ट्रैक परिवहन कार्यालयों में बनाए जाएंगे।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आने वालों को अब इन्हीं ड्राइविंग ट्रैक पर गाड़ी चलाकर दिखाना होगा।
इसके बाद ही उन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए बजट में 1.42 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी है।
अभी तक संभागीय परिवहन कार्यालयों में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आने वाले लोगों को मैदान में गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ता है।
इस ड्राइविंग टेस्ट में लोगों को अंग्रेजी के अंक आठ के अनुसार वाहन चलाना होता है। इसके लिए अस्थाई ट्रैक बनाया जाता है।
कई बार विभाग के अधिकारी टेस्ट लेने में लापरवाही कर देते हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने अब कार्यालयों में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनवाने का निर्णय किया है।
पहले चरण में केवल चार जिलों में ही यह ट्रैक बनाए गए थे। इनमें लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद व अलीगढ़ शामिल हैं।
अब सरकार ने इस साल 20 और जिलों में इस तरह के अत्याधुनिक ट्रैक बनाने का निर्णय किया है।
प्रत्येक कार्यालय में एक दोपहिया व एक चौपहिया वाहनों के लिए ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने निर्धारित नक्शा भी जारी कर दिया है।
इसी नक्शे के अनुसार ये ट्रैक बनाए जाएंगे। इसे टीन शेड के एक बड़े हॉल में बनाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि बारिश व खराब मौसम में भी ट्रैक खराब न हो सके।
यहां बनेंगे ड्राइविंग ट्रैक
गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, सुलतानपुर, अंबेडकरनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, संतरविदास नगर, कुशीनगर, महाराजगंज, बलिया, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया, फतेहपुर, कौशाम्बी, बागपत और बिजनौर।