केजीएमयू रेजिडेंट डॉ. तौसीफ ने बताया कि रमजान माह में नेक काम शुरू करने का मौका मिला। किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई काम नहीं हो सकता है। रोजे के पहले दिन प्लाज्मा डोनेट करने का मौका मिलने से बहुत खुश हूं। इस्लाम में भी इस बात का जिक्र है कि सेहतमंद व्यक्ति दूसरों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा अथवा रक्तदान कर सकता है।
दूसरों की जिंदगी बचाना पहला फर्ज
उमा शंकर पांडेय कहते हैं कि कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद मुझे लगा कि जिंदगी खत्म हो जाएगी, लेकिन ऊपर वाले की मेहरबानी और डॉक्टरों की दरियादिली की वजह से बच गया। अब दूसरों की जिंदगी बचाना मेरा फर्ज है। मुझे पता चला कि मेरे प्लाज्मा से दूसरे की जिंदगी बच सकती है तो मैं तैयार हो गया और आज प्लाज्मा डोनेट कर दिया।