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45 साल बाद ब्रिटेन से वतन के लिए लौटा लखनऊ का बेटा

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ब्रिटेन में लॉर्ड की उपाधि पाने वाला राजधानी का बेटा और लंदन इंटरनेशनल हॉस्पिटल के चेयरमैन लॉर्ड डॉ. खालिद हमीद 45 साल बाद अपने वतन की सेवा को लौटेंगे।  95वें स्थापना दिवस पर लखनऊ विश्वविद्यालय अपने इस एल्युमनाई को 25 नवंबर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजेगा।
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लॉर्ड खालिद राजधानी में हार्ट, ब्रेन और कैंसर के इलाज के लिए इंटरनेशनल स्तर का हॉस्पिटल बनाने का एलान कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह अस्पताल दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। सोमवार को लॉर्ड खालिद ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में शहर-ए-तहजीब से जुड़ी अपनी ढेरों यादें और सपने साझा किए।

लॉर्ड खालिद हमीद कहते हैं- ‘जहां पैदा हुए, पले-बढ़े, उस जगह के लिए जरूर काम करें। जब ईश्वर ने समाज की सेवा करने लायक बनाया है, तो ऐसे मौके को गंवाना नहीं चाहिए।’ उनके ये शब्द बता देते हैं कि उनका लखनऊ से किस कदर जुड़ाव है। वे आगे जोड़ते हैं- अब तक तीन-चार महीने में घर आ पाता था। पर, अब पूरी तरह से वतन वापसी कर रहा हूं।
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चाहता हूं कि दो साल में यहां लखनऊ इंटरनेशनल हॉस्पिटल तैयार हो जाए। यह अस्पताल गोमतीनगर विस्तार में बनेगा। यहां हार्ट, ब्रेन और कैंसर का इलाज होगा। इस हॉस्पिटल में गरीबों को भी पैसे के अभाव में इलाज से महरूम नहीं होना पड़ेगा। गरीबों के लिए भी विशेष व्यवस्था रखी जाएगी।

हॉस्पिटल में इन तीनों क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन में शोध भी होगा। लॉर्ड डॉ. खालिद ने बताया कि अभी तो वह हर 3-4 माह में अपने घर आते हैं लेकिन जल्द ही इस हॉस्पिटल के लिए पूरी तरह से वापसी करेंगे।
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मैं कभी नहीं भूला लखनऊ

लॉर्ड खालिद कहते हैं, लखनऊ कभी भूल नहीं सकता। एलयू से ही  1960 में बीएससी किया। 1961 में डिप्लोमा इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की। 1966 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया।

1970 में लंदन शिफ्ट हो गया। इन 45 सालों में कई मेडिकल संस्थानों में सेवाएं दी। क्रॉमवेल हॉस्पिटल के सीईओ व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के बाद लंदन इंटरनेशनल हॉस्पिटल का चेयरमैन बना। प्रोफेशन में रमने के बावजूद लखनऊ कभी नहीं भूला।

...वो दोस्तों के साथ चाय समोसे का दौर

लॉर्ड खालिद कहते हैं-लखनऊ विश्वविद्यालय के दोस्त कभी नहीं भूले। जब भी यहां क्लासेज से थोड़ा खाली समय मिलता तो हम कॉमर्स फैकल्टी केपास बने मिल्कबार या कैंटीन पहुंच जाते। दोस्तों के साथ समोसे और चाय का दौर शुरू होता।

उन दिनों क्लासेज बंक करने का रिवाज तो था नहीं। खास तौर से हम साइंस के स्टूडेंट्स तो बहुत ही रेग्युलर रहते थे। यदि ब्रेक कम समय का होता तो खाली समय साइंस फैकल्टी में ही दोस्तों के साथ बातें करने में बीत जाता। उस समय छात्र राजनीति तो थी, लेकिन छात्रनेता बिना वजह हंगामा नहीं करते थे। लखनऊ विश्वविद्यालय में आने को लेकर यह काफी उत्साहित हूं।

अपने वतन में मिला पद्मश्री और पद्म भूषण

लॉर्ड डॉ. हमीद को  2005 में स्टर्नबर्ग अवॉर्ड से नवाजा गया। 2007 में इंटररिलीजस एंड इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर वर्ल्ड पीस की ओर से एंबेसडर फॉर पीव अवार्ड और इसी साल एशियन ऑफ द ईयर अवार्ड प्रदान किया गया। उनके सामाजिक योगदान व उपलब्धियों को देखते हुए ब्रिटेन में उन्हें 2007 में लॉर्ड की उपाधि दी गई।  

भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्मश्री से नवाजा। सात जनवरी 1997 को राजभवन में हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह में उन्हे डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि दी गई। 2009 में भारत सरकार ने पद्मभूषण से नवाजा।
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