मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
लखनऊ। सौ नाटकों के एक हजार से ज्यादा शो कर चुके वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी 84 वर्ष की उम्र में भी थकने को तैयार नहीं हैं। पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा के बाद से उनके अभिनय में और भी ज्यादा निखार देखने को मिल रहा है। सोमवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह के दूसरे दिन बीएम शाह प्रेक्षागृह में मंचित हुए नाटक डैडी में डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्ग की भूमिका निभाकर उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वे वाकई रंगमंच के डैडी हैं।
दर्पण संस्था की ओर से डैडी के मंचन के दौरान डॉ. अनिल रस्तोगी का अभिनय देखकर दर्शकों ने ठहाके लगाए तो कई बार उनकी आंखें भी नम हुईं। डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्ग और उनकी बेटी के बीच मार्मिक रिश्ते की यह कहानी एक बार फिर दर्शकों के दिलों को छू गई। मंच पर डॉ. रस्तोगी का वही पुराना जोश और सशक्त संवाद अदायगी देखकर दर्शक वाह-वाह कह उठे।
यह नाटक प्रसिद्ध फ्रांसीसी नाटककार फ्लोरियन जैलर के नाटक ''ले पेरे'' से प्रेरित है। बेटी अन्नू के किरदार में शालिनी विजय ने सशक्त अदाकारी से खूब तालियां बटोरीं। फ्लोरियां जैलर के नाटक ‘ले पेरे’ से प्रेरित डैडी की परिकल्पना वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ की रही। पिता की बार-बार जाती याददाश्त की वजह से बेटी परेशान तो होती है लेकिन वह किसी भी हाल में अपने पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहती। इसी कश्मकश में वह अंतत: अपने बुजुर्ग पिता की देखभाल की जिम्मेदारी को प्राथमिकता देती है। मंच पर अन्य प्रमुख कलाकारों में साक्षी उस्मान, पूजा सिंह, अजय शर्मा, अभिषेक सिंह, अभिषेक पाल और विपिन ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। करीब 90 मिनट की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा।
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद
मंचन करते डॉ. अनिल रस्तोगी। -संवाद