अमर उजाला मेडिकल हेल्पलाइन में रविवार को पैथोलॉजिस्ट डॉ. अमित रस्तोगी ने लोगों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि यदि प्लान करके ब्लड संबंधी जांच करा रहे हैं तो खाली पेट कराना ज्यादा फायदेमंद रहता है। डायबिटीज के मरीज हैं तो पहले खाली पेट जांच कराएं और फिर नाश्ता करें। इसके बाद भरपेट खाना खाएं और ठीक 2 घंटे बाद दोबारा सैंपल दें। इससे रिपोर्ट एकदम सही आती है। पेश हैं प्रमुख सवाल जिसे ज्यादातर लोगों ने पूछा।
सवाल- मैं हर साल खून की जांच करा लेता हूं। क्या खाली पेट होना जरूरी है? - विश्वास कुमार गोमती नगर, राजिया बैग हसनगंज
जवाब- यदि आप प्लान करके जांच करा रहे हैं तो खाली पेट ही कराना चाहिए। लेकिन तमाम जांचें ऐसी भी हैं जो इमरजेंसी में खाना खाने के बाद भी कराई जा सकती हैं। खाली पेट होने से ब्लड शुगर और सीरम की स्थिति पता चल जाती है। इसी तरह पेशाब की जांच का सैंपल भी सुबह का लेना चाहिए। कुछ बूंद पेशाब करने के बाद सैंपल लें तो ज्यादा बेहतर माना जाता है।
सवाल- मुझे शुगर है। इसकी जांच कराते समय क्या सावधानी बरतें? - संजय शुक्ला हसनगंज, राजकुमार गोमती नगर
जवाब- हर 3 से 6 माह में ग्लाइको हीमोग्लोबिन की जांच करा लेनी चाहिए। इससे सही स्थिति की जानकारी हो जाती है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है वे अपनी दिनचर्या जांच के दिन भी नियमित ही रखें। सुबह दवा लेते हैं तो ले लें। फिर फास्टिंग सैंपल दें। इसके बाद नाश्ता करें और फिर खाना खाएं। खाना खाने के दो घंटे के बाद सैंपल देना बेहतर माना गया है। कुछ लोग पहले सैंपल देने के बाद तत्काल भरपेट भोजन कर लेते हैं और फिर सैंपल देते हैं यह गलत है। इसी तरह जो लोग घर पर जांच करते हैं वह जांच में प्रयोग होने वाली ग्लूकोमीटर की स्ट्रिप की एक्सपायरी जरूर देखें।
डॉ. अमित रस्तोगी
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सवाल- मुझे लंबे समय से थायरॉइड है। इसकी जांच के दौरान क्या सावधानी बरतें? - सुमन लता इंदिरा नगर, पारुल चौक
जवाब- थायरॉइड की जांच खाली पेट ही करानी चाहिए। क्योंकि सुबह के सैंपल और शाम के सैंपल में रिपोर्ट अलग-अलग आती है। खाना खाने के बाद शरीर में कई एंजाइम ऐसे निकलते हैं जो थायरॉइड के स्तर को बढ़ाते घटाते रहते हैं। थायरॉइड का स्तर अधिक होने पर आयोडीन की कमी पूरा करने वाली दवाएं दी जाती हैं। दवा डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही शुरू करनी चाहिए। क्योंकि मूल्यांकन करने के बाद डॉक्टर डोज का निर्धारण करता है। हर दो से तीन माह बाद दोबारा जांच करा कर स्थिति देखते रहना चाहिए। क्योंकि दवा लेने के बाद थायरॉइड का स्तर घटता और बढ़ता है।
सवाल- मुझे विटामिन डी की कमी है। इसके लिए क्या करें? - दलजीत चौक, शिव कुमारी पटेल नगर
जवाब- हर व्यक्ति को कम से कम 40 से 45 मिनट धूप में जरूर निकलना चाहिए। इससे विटामिन डी की पूर्ति होती रहती है। जो लोग लगातार एसी में बैठते हैं उनमें विटामिन डी और विटामिन बी 12 की कमी पाई जाती है। जांच के बाद इसके कैप्सूल दिए जाते हैं, जो शरीर में विटामिन डी की पूर्ति करने में सहायक होते हैं। इसमें भी 3 माह बाद दोबारा जांच कराकर स्थिति देख लेना चाहिए। खानपान में दूध और उस से बनी हुई चीजें ली जा सकती हैं।
सवाल- मैं खुद को फिट करने के लिए हर साल जांच कराना चाहता हूं। कौन सी जांचें जरूरी हैं? - सुभाष गोमती नगर, राजेश यादव जानकीपुरम
जवाब- अपनी मर्जी से पैथोलॉजी में जाकर जांच कराना गलत है। इससे आपका मकसद हल नहीं होगा। पहले डॉक्टर को दिखाएं। अपनी समस्या बताएं। फिर डॉक्टर यह बता देंगे कि कौन-कौन सी जांच करानी है। पैथोलॉजी में अनगिनत जांचें होती हैं। यह मरीज की स्थिति और बीमारी पर निर्भर करती है कि कौन सी जांच करानी है। अपनी मर्जी से जांच कराना सिर्फ पैसे की बर्बादी है। डॉक्टर से स्क्रीनिंग कराने के बाद जांच कराने से संबंधित रिपोर्ट देखकर आप अपनी सेहत में सुधार कर सकते हैं।