लखनऊ। क्षेत्र पंचायत की ओर से आवंटित धनराशि के उपयोग में नियमों की अनदेखी और निर्देशों के अनुपालन में हीलाहवाली पर शासन ने संज्ञान लिया है। क्षेत्र पंचायत में पांचवें और 15वें वित्त से कराए जाने वाले कार्यों की जांच की जिम्मेदारी डीपीआरओ को दी गई है। कार्य पंचायत कार्यालय का निरीक्षण भी इसमें शामिल है।
केंद्रीय एवं राज्य वित्त की 70 फीसदी धनराशि से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जाते हैं। 15-15 फीसदी धनराशि को क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के विकास कार्यों में खर्च किया जाता है। लखनऊ में केंद्रीय व राज्य वित्त से क्षेत्र में करीब 20 से 22 करोड़ धनराशि जारी होती है। विकास कार्यों के प्रति उदासीनता और निर्देशों के अनुपालन में शिथिलता मिलने पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने सभी जिलों के डीएम को पत्र जारी कर क्षेत्र पंचायत के कार्यों की जांच डीपीआरओ से कराने की बात कही है। निरीक्षण के समय जिन अभिलेखों की आवश्यकता होगी उन्हें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी/ खंड विकास अधिकारी की रहेगी। डीपीआरओ आदर्श ने बताया कि क्षेत्र पंचायत के कार्यों के निरीक्षण के संबंध में पत्र जारी हुआ है।