गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है यह समय कुत्तों की ब्रीडिंग का है। इसका उनके स्वभाव पर असर पड़ रहा है और वे हिंसक होकर लोगों को काट रहे हैं। बंदर व बिल्ली के काटने के मामले भी बढ़े हैं। राजधानी के तीन प्रमुख अस्पतालों में हर दिन कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले सामने आ रहे हैं।
बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 250 से अधिक मामले कुत्ते के काटने के आ रहे हैं। इसमें करीब 60-70 नए केस होते हैं। 15-20 मरीज पालतू कुत्तों के काटने से जख्मी होते हैं। सिविल व लोकबंधु अस्पताल में भी रोजाना करीब 100 लोग एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि एक माह से कुत्ता, बंदर, बिल्ली काटने के मामले दस फीसदी तक बढ़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के मुताबिक एक महीने में कुल एंटी रैबीज 10 हजार इंजेक्शन लगाए गए हैं।
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बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि कुत्ते काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। रोजाना 50 से 60 केस आ रहे हैं। सिविल अस्पताल में 20-25 और लोकबंधु अस्पताल में भी 15-20 नए मरीज रोजाना आ रहे हैं।
पुराने शहर से ज्यादा मामले
बलरामपुर अस्पताल में एंटी रैबीज लगवाने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा पुराने शहर से हैं। ये मरीज ठाकुरगंज, मौलवीगंज, चौपटिया, वजीरगंज, रकाबगंज व सआदतगंज क्षेत्रों के हैं।
तेजी से बढ़ जाता है तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन
विशेषज्ञ बताते हैं कि जून का महीना कुत्तों की ब्रीडिंग का होता है। इससे कुत्तों में कोर्टिसोल हार्मोन (तनाव वाला हार्मोन) तेजी से बढ़ जाता है और वे असामान्य व्यवहार करने लगते हैं। इससे वे आक्रामक हो जाते हैं। इसलिए इस समय कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं।