- गर्भवती महिलाएं किसी कीमत पर बाहर न निकलें। घर में क्वारंटीन रहें।
- जब तक बहुत जरूरी न हो, जांच के लिए अस्पताल या जांच केंद्रों पर न जाएं।
- यदि पहले से दवाएं चल रही हैं तो परिवार का कोई अन्य सदस्य रिपोर्ट लेकर जाए।
- जरूरत पड़ने पर गायनेकोलॉजिस्ट से मरीज की फोन पर बात करा दें।
- नींबू पानी, फल आदि का सेवन करते रहे। कम खाएं पर पौष्टिक खाएं।
असर तय नहीं, पर सावधानी जरूरी
पीजीआई की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मंदाकिनी प्रधान का कहना है कि विभिन्न जर्नल में जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें तत्काल प्रसव के केस हैं। कोरोना वायरस अभी आया है। तमाम महिलाएं तीन, चार माह की गर्भस्थ हैं। प्रसव होने पर ही इसके असर के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन हर स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्भस्थ शिशु पर पड़ने वाले असर को लेकर दुनियाभर में शोध शुरू हो गया है।
विस्तृत शोध की है जरूरत
पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. टीएन ढोल का कहना है कि जीका, एचआईवी सहित तमाम वायरस का गर्भस्थ शिशु पर असर पड़ता रहा है। कोरोना वायरस अपने आप में नया है। इस पर अभी विस्तृत काम करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में वायरस रिसर्च सेंटर बनाने की जरूरत है, ताकि इसके हर पहलू पर शोध हो सके।