प्रशिक्षण के लिए सीएमओ के माध्यम से नाम भेजे जाएंगे। साथ ही जिलों के असक्रिय एफआरयू की जानकारी सीएमओ ही भेजेंगे। ईमॉक और एलएसएएस प्रशिक्षण के लिए चिकित्सकों की जोड़ियों का नामांकन होगा। पूरे प्रदेश में किसी भी जोड़ीदार को चिह्नांकित किया जा सकता है।
प्रत्येक आवेदक को जोड़ीदार चिकित्सक की जानकारी भी देनी होगी। इन्हें प्रशिक्षण के बाद असक्रिय एफआयू को क्रियाशील करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि प्रशिक्षण के बाद असक्रिय एफआरयू में जोड़ी कार्य नहीं करेगी तो उनसे प्रशिक्षण पर खर्च धनराशि की वेतन से वसूली की जाएगी साथ ही कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी होगा।
योजना के संचालन के लिए महानिदेशक परिवार कल्याण की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। इसमें निदेशक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, एनएचएम के भी सदस्य शामिल होंगे। ईमॉक और एलएसएएस प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण का समय भी 16 सप्ताह से 24 सप्ताह किया गया है।