यूपी के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन के बयान से सरकारी चिकित्सकों में गुस्सा है। केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह आक्रोश खुलकर सामने भी आ गया। पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के ऐसे भड़काऊ बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया।
कहा कि प्रशासनिक नियंत्रण में ढिलाई और अव्यावहारिक घोषणाओं से ही डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और अराजकता बढ़ी है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में थी।
दिन भर चली बैठक में प्रदेश भर से पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक शुरू होते ही डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और स्वास्थ्य मंत्री की बयानबाजी ने माहौल गर्म कर दिया।
अधिकतर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री के दो दिन पहले दिए बयान ‘अब डॉक्टरों पर डंडा चलेगा और डॉक्टर सीधे जेल जाएंगे’की जमकर निंदा की। उन्होंने कहा,विभाग के मंत्री तीन साल से ऐसे गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं।
उन्हें निष्ठावान और कदाचार में लिप्त चिकित्सा कर्मियों के बीच स्पष्ट विभाजन रेखा खींचनी चाहिए। सभी को जेल भेजने जैसी धमकी से समर्पित व योग्य चिकित्सकों का मनोबल गिर रहा है। यदि चाटुकार और गड़बड़ी कर रहे अधिकारियों पर डंडा चला होता तो विभाग सुधर गया होता।
हिंसा के मामलों में नहीं हुई कार्रवाई
जनपदों में चिकित्सकों पर हमलों के मामले में कार्रवाई न होने पर केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आए पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई।
संघ के अध्यक्ष डॉ.अशोक यादव और महासचिव डॉ.सचिन वैश्य ने बताया कि इलाहाबाद,अमेठी, हमीरपुर,फर्रुखाबाद,बहराइच,उरई,आजमगढ़, रामपुर,गाजियाबाद,सुल्तानपुर,रायबरेली और लखनऊ में चिकित्सा कर्मियों के साथ हिंसा-मारपीट की घटनाएं हुई हैं।
फर्जी शिकायतें कर अस्पतालों में अव्यवस्था फैलाई गई। इससे चिकित्सकों का मनोबल गिरा है। इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट पर भी सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।
डॉक्टरों ने कैबिनेट के फैसले के बावजूद विशिष्ट एसीपी नहीं देने पर आश्चर्य जताया। कहा,मुख्यमंत्री की घोषणा पर अधिकारी कुंडली मारे बैठे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है। उन्होंने कहा, चिकित्सकों के खिलाफ होने वाली शिकायतों का संज्ञान शासनादेश के अनुसार शपथ पत्र पर लिया जाए। साथ ही इनका समयबद्ध निस्तारण हो।