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मरीज को लगाया गया प्लास्टिक का हाथ, कर सकेंगे जरूरी काम

Tue, 12 Jul 2016 01:12 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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मोहम्मद हुसैन - फोटो : amar ujala
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सड़क हादसे में दाहिना हाथ गंवाने वाले मो. हुसैन (58) ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह फिर पहले की तरह अपने जरूरी काम कर सकेंगे। कई डॉक्टरों की निराशाजनक सलाह से अपंग हुए हुसैन का मनोबल गिरता गया। हर तरफ से हार मानकर परिवारीजन हुसैन को केजीएमयू लेकर पहुंचे। 
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जरूरी जांचें और इलाज के बाद अब हुसैन पहले की तरह चुस्त दुरुस्त दिखाई देने लगे। केजीएमयू के पीएमआर विभाग के डॉक्टरों ने प्लास्टिक का मैकेनिकल हैंड लगाकर मो. हुसैन को एक नई जिंदगी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मैकेनिकल हैंड से हुसैन पहले की तरह ही अपने काम कर सकेंगे। 
 
 केजीएमयू के फिजिकल एंड मेडिसिन रिहैबलिटेशन सेंटर के डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि संडीला के मो. हुसैन (58) का दाहिना हाथ सड़क हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। काफी समय तक इलाज चला लेकिन कंधे के पास कोशिकाओं के काम नहीं करने से डॉक्टरों ने हाथ को अलग कर दिया। 
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अपंगता का शिकार होने के कारण हुसैन मानसिक तनाव में रहने लगे। आर्टिफिशियल हाथ लगाने के लिए कई अस्पतालों की दौड़ लगाई लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। डॉक्टरों ने बताया कि कंधे में उतनी ताकत नहीं है जिससे आर्टिफिशियल हाथ लगाया जा सके। 

डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि हर तरफ से निराशा मिलने पर परिवारीजन हुसैन को फिजिकल एंड मेडिसिन रिहैबलिटेशन सेंटर लेकर पहुंचे। यहां जांच में पता चला कि कंधे में इतनी ताकत है कि मैकेनिकल हैंड लगाकर मरीज को नई जिंदगी दी जा सके। 

पीएमआर विभाग के कृत्रिम अंग वर्कशॉप के प्रभारी अरविंद कुमार निगम ने बताया कि विभागाध्यक्ष के निर्देश पर मरीज की जांच शुरू हुई। इसके बाद कंधे के पास से मैकेनिकल हैंड लगाने की तैयारी की गई।
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मरीज को सभी तरह के काम करने की दी जाएगी ट्रेनिंग

डेमो
इसमें कंधे के पास से पॉलीस्टर लिक्विड प्लास्टिक मैटेरियल से हाथ तैयार किया गया। इस हाथ को कंधे के पास से सॉकेट, स्प्रिंग और पेंच की मदद से जोड़ा गया।

फंक्शनल हैंड लगने के बाद मरीज सामान्य तरह के काम आसानी से कर सकता है। इसमें थाली, प्लेट उठाना, कंघी करना, गाड़ी चलाना, खाना पीना, समेत सभी तरह के काम शामिल हैं। 

अरविंद कुमार निगम ने बताया कि लिक्विड प्लास्टिक मैटेरियल से आर्टिफिशियल हाथ बनाने में कुल बारह दिन का समय लगा। सोमवार को प्रॉस्थेसिस ‘मैकेनिकल हैंड’ लगने के बाद अब मरीज ठीक है।

करीब एक महीने के एक्सरसाइज में मरीज को सभी तरह के काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वह अपने सभी काम आसानी से कर सकेगा। मरीज के पास मैकेनिकल हैंड लगाने के लिए एक रुपये भी नहीं था।

उसकी हालत देखते हुए विभागाध्यक्ष ने सात हजार रुपये का फंड जुटाया। मरीज की अपंगता के बाद से शुरू हुई परेशानी को बारह दिन में ही दूर कर दिया गया। 

केजीएमयू, पीएमआर विभाग की सीनियर प्रोस्थेटिस्ट शगुन सिंह और वर्कशॉप प्रभारी अरविंद निगम ने बताया कि सात हजार रुपये में मैकेनिकल हैंड बनाया गया है।

निजी संस्थान में इसका खर्च 75 हजार रुपये से अधिक है। इसके बाद एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी के लिए भी कम से कम 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि केजीएमयू में यह मुफ्त है।

अरविंद निगम ने बताया कि कंधे के पास से प्रोस्थेसिस ‘मैकेनिकल हैंड’ लगाया गया है। स्प्रिंग की मदद से वह पूरा काम करेगा। हाथ की कोहनी मोड़ने के लिए कंधे को आगे की तरफ ताकत लगानी होगी, जिससे हाथ मुड़ जाएगा।

डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि कंधे की मजबूती के लिए जरूरी दवाएं चलाई जाएंगी। उसकी डाइट पर भी ध्यान दिया जाएगा। ताकत के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी जिससे किसी तरह की परेशानी होने पर उसे तुरंत ठीक किया जाए। 
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