केजीएमयू के डॉक्टरों ने हादसे में कटे पंजे को हाथ से जोड़कर एक और युवक को नया जीवन दिया है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने समय बचाने और गोल्डन ऑवर ट्रीटमेंट के फार्मूले पर अमल करते हुए दूसरी सर्जरी में व्यस्त एनेस्थेटिस्ट के आने का इंतजार नहीं किया, बल्कि युवक को बेहोश किए बिना सर्जरी शुरू कर दी।
छह घंटे के ऑपरेशन के बाद युवक का पंजा दोबारा जोड़ दिया। मरीज की हालत अब पूरी तरह ठीक है और उसके पंजे में मूवमेंट भी हो रही है।
21 मई को लकड़ी कारखाने में काम करते वक्त सीतापुर के लहरपुर के सलमान (24) के दाएं हाथ का पंजा मशीन के धारदार ब्लेड से कटकर पूरी तरह अलग हो गया था। परिवारीजन उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गए वहां से रेफर किए जाने के बाद तीन घंटे बाद ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. बृजेश मिश्रा ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे सलमान जब ट्रॉमा सेंटर पहुंचा था, उस वक्त ओटी में मेजर ऑपरेशन चल रहे थे।
बिना बेहोश किए शुरू कर दिया ऑपरेशन
सलमान के कटे पंजे को देखने के बाद उसके खराब हो चुके हिस्से को अलग करने के साथ ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय ओटी में बेहोशी का कोई डॉक्टर नहीं मिला। सभी एनेस्थेटिस्ट दूसरे ऑपरेशन में व्यस्त थे। ऐसे में सलमान को बेहोश किए बिना ऑपरेशन शुरू करने का फैसला लिया गया।
शाम करीब चार बजे तक ऑपरेशन चलता रहा। उसके बाद एनेस्थेटिस्ट के आने पर ऑपरेशन ने रफ्तार पकड़ी। छह घंटे की सर्जरी के बाद सलमान के कटे पंजे को सर्जिकल वायर की मदद से दोबारा उसके हाथ से जोड़ दिया गया।
डॉ. बृजेश मिश्रा ने पंद्रह दिन बाद सलमान की सभी रिपोर्ट सामान्य आने के बाद बृहस्पतिवार को बताया कि सलमान के हाथ में मूवमेंट के साथ रिकवरी भी फास्ट हो रही है और कोई खतरा नहीं है। पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे।
हड्डी, नसों को जोड़ना थी चुनौती
डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि पंजा जहां से अलग हुआ था वहां हड्डियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। हड्डियों को बराबर कर उन्हें सेट करने के लिए सर्जरी इक्वीप्मेंट की मदद से उन्हें ट्रिम किया गया।
फिर हाथ की रक्त कोशिकाओं और नसों को जोड़ने का काम शुरू हुआ, ताकि ब्लड सप्लाई जारी रहे और हाथ पहले की तरह काम करता रहे।
कई बार ऐसे मामलों में जरा सी चूक और नसों के आपस में न जुड़ने पर रक्त प्रवाह रुक जाता है। इससे अपंगता के साथ संक्रमण का खतरा हो जाता है। वहीं, हड्डियों को ट्रिम करने से हाथ में एक से दो सेंटीमीटर का अंतर आ जाता है।
इन डॉक्टरों की टीम ने किया कमाल
सलमान के ऑपरेशन में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. बृजेश मिश्रा के अलावा डॉ. वरुण सिंगला, डॉ. शिवानी, डॉ. मुक्ता, एनेस्थेटिस्ट डॉ. अरविंद कुमार और स्टाफ नर्स अर्चना और प्रिया लगातार छह घंटे जुटे रहे।
थोड़ा सा बरतें सावधानी
डॉ. बृजेश मिश्रा बताते हैं कि शरीर का कोई अंग कट जाए तो घबराने के बजाय पहले सुरक्षित तरीके से कटे अंग और हिस्से को गंदगी व संक्रमण से बचाएं।
जख्म के आसपास गंदगी है तो उसे साफ करें और अंग कटने के बाद से खून बहने से हर हाल में रोकें। अधिक खून बहने पर मरीज के ऑपरेशन में दिक्कत होती है।
अद्भुत था ये केस
केजीएमयू में अंगुली और हाथ में हाफ कट के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन सलमान का पूरा पंजा हाथ से अलग हो गया। डॉ. बृजेश मिश्रा बताते हैं कि पंजे को जोड़ने के लिए स्थिति न के बराबर होती है।
भयंकर गर्मी में कटा हुआ अंग जल्दी संक्रमित होता है और उसकी कोशिकाएं जल्द खराब होती हैं। लेकिन सलमान के पंजे और हाथ को गर्मी के चलते उतना नुकसान नहीं हुआ था। इसी को देखते हुए सर्जरी प्लान की गई।
इन बातों का रखें ध्यान
- कटे अंग पर धूल मिट्टी न लगी हो
- उसको अच्छे से साफ करें, फिर लाएं
- दवा लगाने की गलती कतई न करें
- अंग को खुद चिपकाने का प्रयास न करें
- कटे अंग को बर्फ में लेकर अस्पताल जाएं
- कटा हुआ अंग सीधे बर्फ के संपर्क में न आए
- अंग को साफ पॉलीथीन में रखने के बाद लाएं
- अंग आईस क्यूब के बीच रखा हो तो अधिक अच्छा
- कटे हुए अंग पर खून के थक्के को साफ कर दें
यहां पा सकते हैं मदद
इस तरह का हादसा होने पर प्लास्टिक सर्जरी विभाग के टोल फ्री नंबर 9415203444 पर फोन कर जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा केजीएमयू पहुंचने से पहले इसकी जानकारी दे दी जाए तो टीम को तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा केजीएमयू के सेट्रल पीआरओ के फोन नंबर 9415007710 या ट्रॉमा सेंटर के पीआरओ के फोन नंबर 9453004209 पर जानकारी दी जा सकती है।