मो. मीसम जब पांच साल का था तो उसके सीने के बायीं तरफ छोटी सी गिलटी उभर आई। जैसे-जैसे मीसम की उम्र बढ़ी गिलटी भी बढ़ने लगी।
आठ साल की उम्र होने तक ये गिलटी ट्यूमर में बदल गई और बायीं कांख के नीचे तक बढ़ गई। मीसम को इससे दिक्कत होने लगी।
इसके बाद परिवारीजन उसे लेकर केजीएमयू पहुंचे। जहां कई विभागों की ओर से मना कर देने के बाद आखिरकार पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. जेडी रावत और उनकी टीम ने मीसम को ट्यूमर से निजात दिला दी।
जल्दी ही उसे केजीएमयू से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
मीसम की सर्जरी करने वाले पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जेडी रावत ने बताया कि मीसम का ट्यूमर बायीं तरफ सीने के ऊपर बढ़ रहा था।
उसमें तीन पसलियां भी भी चिपकी हुई थीं और ट्यूमर दिल की तरफ बढ़ रहा था। जब मीसम पहली बार उनके पास आया तो जांच के बाद दिल के ऊपर का ट्यूमर होने और गंभीरता को देखते हुए सीटीवीएस विभाग में रेफर कर दिया।