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लखनऊ : डॉक्टर बोला- बेड खाली नहीं, कहीं और ले जाओ, एंबुलेंस में मर गई महिला

Fri, 10 Sep 2021 08:50 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

महिला के बेटे अजय का आरोप है कि डॉक्टर ने एक बार एंबुलेंस तक जाकर उनकी मां का हाल लेने की जहमत भी नहीं उठाई। वहीं, स्टाफ बेड खाली होते ही भर्ती करने का आश्वासन देता रहा। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में लाई गई महिला को बेड खाली न होने से एंबुलेंस से उतारा तक नहीं गया। वहीं, किसी डॉक्टर ने उसे देखा तक नहीं। ऐसे में महिला करीब एक घंटे तक एंबुलेंस में तड़पती रही और वहीं दम तोड़ दिया। बेटे का आरोप है कि पहले निजी अस्पताल ने इलाज के नाम पर लूटा। इसके बाद बलरामपुर अस्पताल में डॉक्टर ने बेड खाली न होने का हवाला देकर दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कह दी। उसकी मां को एक बार देखा तक नहीं गया। ऐसे में इलाज न मिलने से उनकी जान चली गई।

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अमेठी के अजय प्रकाश ने बताया कि ब्रेन हैमरेज होने पर वह मां राजपति (65) को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां गेट पर ही दलालों ने घेर लिया और बेहतर इलाज का झांसा देकर जानकीपुरम स्थित निजी अस्पताल ले गए। यहां रात भर मरीज को भर्ती रखा। अजय का आरोप है कि निजी अस्पताल में 40 हजार रुपये वसूले गए। इसके बावजूद मां की हालत न सुधरी तो वह किसी तरह उन्हें वहां से डिस्चार्ज कराकर एंबुलेंस से गुरुवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां मौजूद डॉक्टर ने बेड खाली न होने की बात कहते हुए दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया। 

अजय का आरोप है कि डॉक्टर ने एक बार एंबुलेंस तक जाकर उनकी मां का हाल लेने की जहमत भी नहीं उठाई। वहीं, स्टाफ बेड खाली होते ही भर्ती करने का आश्वासन देता रहा। इलाज के इंतजार में एक घंटे तक एंबुलेंस में तड़पते हुए उनकी मां ने दम तोड़ दिया। अजय ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की शिकायत की है। 
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कोविड रिपोर्ट के इंतजार में जा रही जान
बलरामपुर असपताल की इमरजेंसी में 40 बेड हैं। यह एक बार फुल होने के बाद डॉक्टर मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर लौटा देते हैं। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की कोविड रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें संबंधित विभागों में भेजा जाता है। इस दौरान अन्य की भर्ती प्रभावित रहती है। ऐसे में गंभीर मरीजों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है।

मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो इसकी पड़ताल करके संबंधित डॉक्टर से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल

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