सूबे के कई मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जानलेवा होती जा रही है। इलाज के अभाव में पिछले तीन दिनों में 34 मरीजों की मौत हो चुकी है। 14 मौतें तो अकेले सोमवार को हुईं।
लखनऊ के केजीएमयू में सोमवार को 11 मरीज समेत 13 और कानपुर के अब तक 19 मरीजों की मौत हो चुकी है। ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में पहुंचे कई मरीजों ने गेट के सामने ही दम तोड़ दिया लेकिन जूनियर डॉक्टर नहीं पसीजे।
वे आपस में मुस्कुराते रहे। गौरतलब है कि कानपुर में सपा नेता और जूनियर डॉक्टरों की मारपीट के विरोध में केजीएमयू और ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी मंगलवार को हड़ताल की वजह से लोग परेशान हुए।
सीएम ने आश्वासन देकर पल्ला झाड़ा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानपुर में सपा विधायक और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट की घटना को कमिश्नर या किसी उच्चस्तरीय अधिकारी से जांच कराने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। जिसकी भी गलती होगी, उस पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
अफसरों को निर्देश दिया गया है कि दोनों ही पक्ष से दो-दो लोगों को बुलाकर फुटेज दिखाए जाएं और कार्रवाई करें।
उन्होंने डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की। हालांकि यह जरूर कहा कि अभी सरकार का कोई मंत्री वहां नहीं जाएगा।
आईएमए ने भी दे दी चेतावनी
कानपुर में छात्रों पर हुए पुलिसिया कहर के खिलाफ डॉक्टरों के विरोध की चिंगारी दिल्ली तक पहुंच गई है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने चेतावनी दी है कि दो दिनों में सपा विधायक इरफान सोलंकी और कानपुर के एसएसपी यशस्वी यादव के खिलाफ कार्रवाई तथा पूरे मामले की न्यायिक जांच नहीं हुई तो देश भर में चिकित्सा सेवाएं ठप कर दी जाएंगी।
आईएमए के महासिचव डॉ. नरेन्द्र सैनी ने आरोप लगाया कि सपा विधायक की शह पर ही मेडिकल स्टूडेंट की पिटाई की गई।
सैनी ने कहा कि घटना के विरोध में देश भर के चिकित्सक मंगलवार और बुधवार को काली पट्टी बांधकर इलाज करेंगे।
सीनियर डॉक्टर भी आए सपोर्ट में, ओपीडी ठप
अपने साथियों को न्याय दिलाने की मुहिम में जुटे डॉक्टरों ने भी संवेदनहीनता की हद पाकर दी। पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से ओपीडी से हजारों मरीजों को वापस लौटना पड़ गया।
सोमवार सुबह से ही ओपीडी में आए मरीज जब पर्चा बनवाने गए तो वहां मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा बनाने वाले कर्मचारी को वापस लौटा दिया।
जिन मरीजों के पर्चे बनाए गए थे, उनके पर्चे फाड़ दिए गए। मरीजों और तीमारदारों ने नाराजगी जताई तो उन्हें डांटकर भगा दिया गया। सीनियर डॉक्टरों ने भी उनकी इस मुहिम का समर्थन किया।
पुरानी ओपीडी ब्लॉक, न्यू ओपीडी ब्लॉक, क्वीन मेरी और डेंटल ओपीडी में पहुंचे मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। ओपीडी के बाहर सुबह आठ बजे से ही जूनियर डॉक्टरों ने गेट पर ताला लगा दिया। कई सीनियर डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे ही नहीं, जो आए तो वो ताला बंद देखकर वापस लौट गए।
गर्भवतियों को भी नहीं मिला इलाज, ऑपरेशन टले
ठाकुरगंज के संतराम की गर्भवती पत्नी राजेश्वरी (28) ओपीडी में सुबह नौ बजे जांच के लिए पहुंची थीं। एक घंटा लाइन में लगने के बाद जब पर्चा बनना शुरू होने वाला था।
उसी दौरान जूनियर डॉक्टर वहां पहुंचे और पर्चे का पूरा बंडल उठाकर पर्चा बनाने का काम बंद करा दिया। ओपीडी कक्ष में नारेबाजी करते हुए सभी मरीजों को वापस निकाला शुरू कर दिया जिसकी वजह से वहां पहुंची गर्भवती और प्रसूताएं बिना इलाज के वापस लौट गईं।
एंटी नेटल चेकअप भी नहीं हो पाया। क्वीन मेरी अस्पताल में भर्ती बस्ती की सीमा सिंह (23) को कुछ दिन पहले भर्ती कराया गया था। प्रसव पीड़ा के कारण कुछ दिन पहले भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने सीमा की जांच करने के बाद कहा कि पेट में बच्चे की हालत बेहद गंभीर है ऑपरेशन करना होगा। लेकिन अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल और जगह-जगह जबरदस्ती कामकाज बंद करवाने से दोपहर दो बजे तक सीमा का ऑपरेशन नहीं किया जा सका।
लिंब सेंटर में भी नहीं मिला इलाज
केजीएमयू में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से लिंब सेंटर में आए गंभीर रोगियों को इलाज नहीं मिल सका। ओपीडी में आए मरीज भी बिना इलाज लौट गए।
हाथ-पैर में फ्रैक्चर के बाद प्लास्ट कराने पहुंचे मरीजों को भी जूनियर डॉक्टरों ने भीतर नहीं जाने दिया।
लिंब सेंटर के पुरुष वार्ड में भर्ती कुछ गंभीर मरीजों को ऑपरेशन की डेट दी गई थी लेकिन हड़ताल के चलते उनके ऑपरेशन नहीं हो सके।
कैंडल मार्च निकाल जताया विरोध
केजीएमयू के सैकड़ों जूनियर डॉक्टर दिनभर केजीएमयू के गेट नंबर एक पर प्रदर्शन करते रहे। इन छात्रों ने कानपुर के दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग के साथ विशेष ऑर्डिनेंस पास करने की भी मांग की, जिसमें डॉक्टरों से अभद्रता करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान हो।
बलरामपुर, लोहिया व महिला अस्पताल भी फुल
ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू और क्वीन मेरी अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते काफी मरीज सिविल, बलरामपुर, लोहिया समेत महिला अस्पताल पहुंच गए जिससे वो पूरी तरह से फुल हो गए।
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक दोपहर बारह बजे मरीजों की भीड़ के चलते सभी अस्पताल फुल हो गए। वहीं मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर प्राइवेट एंबुलेंस संचालक और अस्पताल लूटने पर अमादा हैं।
सोमवार को ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू और शताब्दी अस्पताल में इलाज बंद होने से सरकारी अस्पतालों में भारी भीड़ हो गई। बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी दोपहर बारह बजे ही फुल हो गई।
अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में इमरजेंसी में 40 बेड पर भर्ती किसी मरीज को दूसरे वार्ड में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है। अगर हालात यही रहे तो अस्पताल में दूसरे मरीजों की भर्ती पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। सिविल अस्पताल का इमरजेंसी पूरी तरह फुल है।