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Lucknow News: जहां से जारी हुआ ड्राइविंग लाइसेंस, वहीं हो सकेगी बैकलॅाग एंट्री

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अमर उजाला इम्पैक्ट
परिवहन आयुक्त ने जारी किया आदेश, पोर्टल पर बदलाव
बस्ती के डीएल की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवा रहे थे दलाल
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। दूसरे प्रदेशों से ड्राइविंग लाइसेंसों की बैकलाॅग एंट्री का खेल अब खत्म होगा। बैकलॅाग एंट्री कर दलाल डीएल में फर्जीवाड़ा कर रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए ्परिवहन आयुक्त ने बैकलाॅग एंट्री को लेकर बड़ा आदेश दिया है। जिस जिले से वाहन स्वामी का ड्राइविंग लाइसेंस बना है, बैकलाॅग सिर्फ वहीं से हो सकेगी।
मसलन लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ से जारी डीएल की बैकलॅाग एंट्री इसी कार्यालय से हो सकेगी, अन्यत्र किसी जिले या प्रदेश से नहीं। दरअसल, बीते अप्रैल में अमर उजाला ने दलालों द्वारा बैकलॅाग एंट्री कर डीएल के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। बस्ती में दलालों ने 4500 फर्जी डीएल बनवाए थे, इस खबर को प्रकाशित कर सिंडिकेट को उजागर किया था। इसमें बस्ती के ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से की जा रही थी। दलालों के इस सिंडिकेट के खुलासे के लिए लगातार कई दिनों तक खबरें प्रकाशित की गईं। इसके बाद परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा। चूंकि डीएल से जुड़ा कार्य एनआईसी के पोर्टल पर होता है, ऐसे में अधिकारियों से पत्राचार कर बदलाव करने के लिए भी पत्र लिखे गए। इसी क्रम में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आदेश जारी किया गया है। इसके तहत अब जिस जिले से डीएल बना होगा, सिर्फ वहीं से बैकलॅाग एंट्री होगी। जबकि इससे पूर्व दलाल बस्ती, गोरखपुर, मिर्जापुर, संतकबीरनगर आदि जिलों के डीएल की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवा रहे थे। इस सिंडिकेट से सड़क सुरक्षा बढ़ाने को लेकर विभाग की मंशा पर सवाल उठने लगे थे।
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अमर उजाला ने उठाया था सवाल...
जनवरी, 2013 से पहले मैनुएली लाइसेंस बनते थे। जिनका रिकॅार्ड रजिस्टर में रखा जाता था। इसके बाद स्मार्ट कार्ड बनने शुरू हो गए। रिकॅार्ड कम्प्यूटर में रखा जाने लगा। वर्ष 2013 के बाद लाइसेंसों का रिकॅार्ड ऑनलाइन ही है। उन्हें रजिस्टर में रखने की आवश्यकता खत्म हो गई। लेकिन दलालों ने अफसरों से मिलीभगत कर बैकलॅाग एंट्री करवाई और एड्रेस चेंज व रिन्यूवल करवाकर डीएल बनवा दिए। अमर उजाला की ओर से सवाल उठाया गया था कि बैकलॅाग फीडिंग की जरूरत क्यों पड़ी। इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि लर्नर लाइसेंस बनवाए बगैर परमानेंट डीएल बना दिए गए। इतना ही नहीं भारी वाहनों के हेवी लाइसेंस के लिए एक साल पुराना लाइसेंस अनिवार्य है। इस नियम को भी ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए। इस सवाल को गंभीरता से लेते हुए नई व्यवस्था की गई है।

डेटा की सुरक्षा के लिए उठाया कदम
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि सारथी और वाहन डेटाबेस में बैकलाॅग एंट्री को लेकर यह पाया गया कि कुछ राज्यों में बैकलॅाग एंट्री अधिक हो रही है। डेटा की प्रामाणिकता व सुरक्षा बनाए रखने के लिए बदलाव किया गया है। इसके तहत सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। संबंधित राज्य के परिवहन सचिव या परिवहन आयुक्त की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।

तय मियाद के बाद नहीं होगी एंट्री
इतना ही नहीं बैकलॅाग एंट्री केवल उसी एआरटीओ कार्यालय से होगी, जहां से लाइसेंस बना है। तय मियाद के बाद एंट्री नहीं होगी। एनआईसी की ओर से सारथी सिस्टम में ऐसी प्रविष्टियों के लिए स्पष्ट व स्थायी बैकलॅाग मार्कर प्रदर्शित किया जाएगा, जो पूरा रिकाॅर्ड दिखाएगा। इससे ऑडिट में भी आसानी होगी।
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पुराने वाहनों की बैकलॅागिंग करें तत्काल
पुराने वाहनों के जो रिकाॅर्ड राष्ट्रीय रजिस्टर में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें बैकलॅाग के माध्यम से तत्काल अपडेट किया जाए। वाहन स्क्रैपिंग के समय पोर्टल पर बैकलॅाग एंट्री का प्राविधान है, जिसे वाहन स्वामी या स्क्रैप सेंटर ऑपरेटर की ओर से किया जा सकता है, लेकिन अनुमोदित आरटीओ करेगा। 


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