युवा अपने आपको मूल्यवान बनाने के लिए मानवीय गुणों से सुसज्जित करें।
इससे वो समाज का आवश्यक अंग बन सकते हैं और समाज उनकी उपेक्षा कभी नहीं कर
सकता।
सोसाइटी एक सिस्टम है इसमें अपनी जगह ऐसी बनाएं, जहां से हटने पर
सिस्टम को आपकी कमी खले।
यह विचार सोमवार को जयनारायण स्नातकोत्तर
महाविद्यालय के चंद्रशेखर सभागार में दो-दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता
दिव्यांकुर-2013 के उद्घाटन पर प्रतिभागियों के समक्ष डॉ. अनीस अंसारी,
कुलपति, उर्दू-अरबी, फारसी विश्वविद्यालय ने व्यक्त किए।
युवा सांस्कृतिक
प्रतिभा संगम ’’दिव्यांकुर’’ इस वर्ष अपनी दसवीं वर्षगांठ भी मना रहा है,
जिसमें करीब 35 महाविद्यालयों के सैकड़ों युवा छात्र-छात्राएं शिरकत कर
रहें हैं।
वाद-विवाद, तत्क्षण भाषण, गेय काव्य, हस्तशिल्प, नुक्कड़ नाटक,
युगल गायन, समूह गान, समूह नृत्य, रंगोली एंव कथा-लेखन सहित अनेक
सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।