लखनऊ। लविवि में एक बार फिर छात्रसंघ का मुद्दा गरमाता जा रहा है। मंगलवार को विवि के छात्रसंघ भवन पर आयोजित कार्यक्रम में इसी को लेकर हंगामा हो गया। छात्र विंध्या शुक्ला ने छात्रसंघ बहाली व विवि प्रशासन की तानाशाही का मुद्दा उठाया जिस पर उसकी प्रॉक्टर से नोकझोंक हो गई। वहीं पूर्व महामंत्री रामसिंह राणा से भी उनकी काफी बहस हुई।
छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ज्ञानू की 31वीं पुण्यतिथि पर छात्रसंघ व हबीबुल्लाह छात्रावास एल्युमिनाई फाउंडेशन की तरफ से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था। इसमें जब छात्र विंध्या ने छात्रसंघ बहाली के लिए चलाए जा रहे अभियान व विवि प्रशासन की तानाशाही का मुद्दा उठाया तो वहां उपस्थित प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी ने आपत्ति की। इस पर राम सिंह राणा ने कहा कि छात्र के पर्चे में छात्रों से ही जुड़े मुद्दे हैं, जिसे पढ़ने देना चाहिए। छात्र ने जब दोबारा पर्चा पढ़ना शुरू किया तो इसे लेकर बहस बढ़ गई। इसमें प्रॉक्टर और पूर्व महामंत्री के बीच खूब बहस हुई। हालांकि इसे वहां उपस्थित पूर्व पदाधिकारियों व प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने संभाला और दोनों को शांत कराया। बता दें कि कई छात्र-छात्राएं नए सत्र में कैंपस में छात्रसंघ बहाली के लिए अभियान चला रहे हैं। इसे लेकर उनकी दो बार प्रॉक्टोरियल बोर्ड से नोकझोंक हो चुकी है और बोर्ड की ओर से कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा चुकी है।
शिक्षकों-पूर्व पदाधिकारियों ने ज्ञानू को दी श्रद्धांजलि
छात्रसंघ के उपाध्यक्ष रहे ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनसे जुड़े संस्मरण और अपने विचार रखे। सभा में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व राष्ट्रीय सचिव कम्युनिस्ट पार्टी अतुल कुमार अंजान, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डीएवी महाविद्यालय नीरज पांडेय, पूर्व अध्यक्ष केकेसी राजेश शुक्ला, सुशील तिवारी पम्मी, वरिष्ठ छात्रनेता अंशू अवस्थी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लविवि नीरज जैन, मनोज तिवारी, प्रमोद तिवारी पूर्व महामंत्री, पूर्व विधायक बृजेश मिश्रा सौरभ व उपाध्यक्ष अल्पना बाजपेई ने ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू के समय के छात्र हितों में किए गए आंदोलनों व काम को सराहा। कार्यक्रम में छात्रसंघ समन्वयक व कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी, एलुमिनाई फाउंडेशन के सचिव प्रो. सुधीर मेहरोत्रा, डॉ. महेंद्र अग्निहोत्री, डॉ. ओपी शुक्ला, डॉ. राजेश्वर प्रसाद यादव, डॉ. सतेंद्र मिश्रा व डॉ. मनोज शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।