आधी रात राजमार्ग पर उतारे गए दिव्यांग छात्र, रोडवेज कंडक्टर ने नहीं मानी पहचान
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के चार दिव्यांग छात्रों को उन्नाव डिपो की रोडवेज बस के कंडक्टर ने आधी रात को राजमार्ग पर जबरन उतार दिया। छात्रों के पास वैध यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड होने के बावजूद परिचालक ने उनका कार्ड मानने से इन्कार कर किराया मांगा।
घटना के विरोध में अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था ने परिवहन निगम मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई है और दोषी कंडक्टर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। परिवहन निगम के प्रवक्ता अमरनाथ ने बताया कि मामला संज्ञान में लिया गया है और इसकी जांच कराई जा रही है।
संस्था के महासचिव अमन सक्सेना के अनुसार, 24 मई की देर रात बस (यूपी 78 जेटी 7262) से नीरज जैन, पलक जैन, नरेंद्र सिंह चौहान और आशीष पाल आगरा से लखनऊ जा रहे थे। आगरा से कुछ दूर चलते ही कंडक्टर ने उनसे किराया मांगा। छात्रों ने जब अपनी निशुल्क यात्रा की पात्रता दर्शाते हुए यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिखाया, तो परिचालक ने उन्हें अस्वीकार करते हुए नकद भुगतान की मांग की। बोलने में असमर्थ छात्रों ने इशारों से इसका विरोध किया, जिस पर कंडक्टर ने बस रोक दी और चारों छात्रों को आधी रात राजमार्ग पर उतार दिया।
आधी रात राजमार्ग पर उतारे गए दिव्यांग छात्र, रोडवेज कंडक्टर ने नहीं मानी पहचान