लखनऊ। कई बार दिव्यांग अपने मन की बात नहीं कह पाते हैं। ऐसे में उन्हें इलाज के साथ मानसिक सहारे की जरूरत होती है। विशेषज्ञ इन चुनौतियों को समझकर दूर करने का प्रयास करें। इससे मरीजों में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह कहना है लोहिया संस्थान में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन (पीएमआर) विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीएस गोगिया का। वह शुक्रवार को लोहिया संस्थान के प्रेक्षागृह में शुरू हुए तीन दिवसीय अवध एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन कॉन्फ्रेंस (एएपीएमआर कॉन) को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. वीएस गोगिया ने कहा कि अधिकतर दिव्यांग अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते। स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक संवेदनशील, मानवीय और व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए दिव्यांगों की मदद करनी चाहिए। उनके मन की बात को समझें। हौसला बढ़ाएं। आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। आंटोलॉजिस्ट एवं होलिस्टिक हेल्थ कोच कैनी गोगिया ने कहा कि पुनर्वास चिकित्सा में तमाम आधुनिक उपकरण आ गए हैं। उनका इस्तेमाल करें। केजीएमयू के पीएमआर विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने आरटीएमएस मशीन का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि तकनीक स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, न्यूरोलॉजिकल विकार, क्रॉनिक दर्द और अवसाद जैसे मामलों में मददगार है।
कार्यक्रम में मौजूद लोग।
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