आयकर महकमे की जांच इकाई का लखनऊ में निदेशालय खुलने जा रहा है।
यानी कानपुर में तैनात निदेशक (जांच) के कार्य क्षेत्र का दायरा दो हिस्से में बंटने का सिलसिला शुरू हो गया है।
इस निदेशालय के खुलते ही आयकर महकमे में दो निदेशक (जांच) हो जाएंगे। नया निदेशालय खोलने का मकसद यूपी के पूर्वांचल एवं मध्यांचल में आयकर चोरी को रोकना है।
वहीं पूर्वांचल व मध्यांचल के करदाताओं को समस्या के निराकरण के लिए कानपुर के बजाय लखनऊ में दस्तक देनी पड़ेगी।
गौरतलब है कि निदेशक (जांच) का मुख्यालय कानपुर में है। यहां से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आयकर चोरों पर निगरानी रखी जाती है।
इसका दायरा बहुत बड़ा होने के कारण आयकर चोरी पकड़ने में दिक्कत होती है।
इसके मद्देनजर आयकर महकमे ने निदेशक (जांच) कार्य क्षेत्र का पुनर्गठन करते हुए दो हिस्से में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया।
इसके लिए लखनऊ में निदेशक (जांच) का निदेशालय खोलने की सहमति बनी। इसके बाद लखनऊ में निदेशालय खोलने का काम शुरू हो गया है।
इस निदेशालय के निदेशक (जांच) उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एवं मध्यांचल के जिलों की निगरानी करेंगे।
आयकर महानिदेशक (जांच), लखनऊ कृष्णा सैनी का कहना है कि इसी महीने राजधानी में निदेशक (जांच) की तैनाती होने की उम्मीद है।
उधर, कानपुर निदेशालय के निदेशक (जांच) के हिस्से में उत्तर प्रदेश के पश्चिमांचल एवं उत्तराखंड होगा।
ऐसी होगी नई व्यवस्था
लखनऊ में तैनात निदेशक (जांच) लखनऊ, वाराणसी एवं बरेली यूनिट के अफसरों की मदद से आयकर चोरों पर शिकंजा कसेंगे। यानी निदेशक (जांच) को वाराणसी इकाई के जनपद में छापामारी करनी तो उसको कानपुर से रणनीति नहीं बनानी होगी।
नए निदेशालय में आयकर अधिकारियों, निरीक्षकों एवं कार्यालय सहायक को तैनात करने का खाका तैयार हो रहा है।