प्रदेश के बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में करोड़ों का घपला सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने विभाग की प्रमुख डिंपल वर्मा को हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया है। उनकी जगह अनीता सी. मेश्राम को सचिव के तौर पर विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने अमर उजाला को बताया कि सरकार चुनाव के दौरान पंजीरी वितरण के लिए किए गए टेंडर रद्द करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में पंजीरी वितरण के नाम पर करोड़ों की राशि ठिकाने लगाने के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। पिछले वित्त वर्ष में बिना टेंडर के ही 10 चहेती फर्मों से हर महीने 58 करोड़ रुपये की पंजीरी की आपूर्ति करवाई गई।
यही नहीं, आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग को अंधेरे में रखकर उन्हीं फर्मों के नाम फिर टेंडर कर दिए गए। टेंडर में इतनी हड़बड़ी दिखाई गई कि न्याय विभाग की आपत्तियों का भी निराकरण नहीं किया गया।
जल्द ही गिरेगी कुछ और अफसरों पर गाज
डेमो पिक
- फोटो : अमर उजाला
सितंबर-2016 में राज्य प्रयोगशाला, लखनऊ और उससे पहले केंद्र सरकार के फूड एंड न्यूट्रीशन बोर्ड की जांच में पंजीरी के नमूने फेल होने के बावजूद दोषी फर्मों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जबकि, सोनभद्र में घटिया पंजीरी की आपूर्ति करने पर बरेली की फर्म त्रिकाल फूड एंड एग्रो और उन्नाव की नीलगिरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति वहां के डीएम ने विभागीय अधिकारियों से की थी। वित्त वर्ष 2016-17 में चहेती फर्मों को नियमों को ताक पर रखकर पिछले 312 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
इन सब मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने विभागीय प्रमुख सचिव डिंपल वर्मा को हटा दिया। शासन के सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही निदेशालय के कुछ और अफसरों पर भी गाज गिरेगी।
इस मामले में बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि पंजीरी वितरण में घपले के बाबत छपी खबरों को सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। वे खुद इस मामले को देख रही हैं। जांच में दोषी मिलने पर किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।