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Lucknow News: डिजिटल अरेस्ट गिरोह को उपलब्ध कराते थे बैंक खाते, चार गिरफ्तार

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एसटीएफ की गिरफ्त में आ​ए शातिर। 
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लखनऊ। बरेली के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शुकदेव नंदी को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ 29 लाख रुपये हड़पने वाले गिरोह के चार जालसाजों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ठगी के डेढ़ करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में मंगाए थे।
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एसटीएफ में एएसपी लाल प्रताप सिंह के मुताबिक भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शुकदेव नंदी के पास अंजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। इसके बाद गिरोह ने उन्हें झांसे में लेकर रकम हड़प ली। बरेली के साइबर थाने में 26 जून को केस दर्ज किया गया था। छानबीन के दौरान बरेली पुलिस ने एसटीएफ से मदद मांगी थी।



इसके बाद गोमतीनगर से सीतापुर के मोहल्ला नारायन हेमपुरवा निवासी श्याम कुमार, गोंडा के खाजेगांव छपिया निवासी रजनीश द्विवेदी, गोंडा के देवरिया मडडो, खोड़ारे निवासी सुधीर कुमार चौरसिया और बलरामपुर के किठौरा निवासी महेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया गया। आरोपी लखनऊ के अलग-अलग इलाके में किराये का कमरा लेकर रह रहे थे। उनके पास से छह मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक ओर अन्य सामान बरामद किए गए हैं।
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खुद को सीबीआई अफसर बताकर फंसाया



इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय ने बताया कि सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को फोन करने वाले व्हाट्सएप नंबर पर बंगलूरू सिटी पुलिस का लोगो लगा था। कॉलर ने कहा कि आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम एक्टिवेट किया गया है। इसके जरिये ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जॉब फ्रॉड किया गया है। इसका अवैध पैसा आपके खाते में आया है। इसके बाद ठग ने पीड़ित को सीबीआई ऑफिसर दयानायक से बात करने के लिए फोन नंबर दिया। शुकदेव नंदी ने दिए गए फोन नंबर पर संपर्क किया तो कथित दयानायक ने उन्हें डराकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इसके बाद अलग-अलग खातों में उनसे 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। आरोपी ने कहा कि सीबीआई की ऑडिट टीम आपके खाते की जांच करेगी। कुछ दिन बीतने के बाद शुकदेव नंदी को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।



चार माह से कर रहे थे फर्जीवाड़ा



पूछताछ में सुधीर कुमार चौरसिया ने बताया कि चार माह पहले वाराणसी में अंकित नाम के व्यक्ति से उसकी मुलाकात हुई थी। उसने उसे दीपक नाम के व्यक्ति का नंबर दिया। कहा था कि वह कंपनी चलाता है, जिसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए बैंक खातों की जरूरत पड़ती है। बैंक खाते उपलब्ध कराने पर वह कमीशन देता था। इसके बाद सुधीर ने दीपक से बात शुरू कर दी। लालच में आकर सुधीर, श्याम कुमार, रजनीश एवं महेंद्र ने साथ मिलकर बैंक खातों का प्रबंध करना शुरू कर दिया। बैंक खाता संख्या दीपक को टेलीग्राम एप के माध्यम से भेजा जाता था। बैंक खातों में जो रकम आती थी उसे लेने के लिए दीपक अपने साथी फैज को भेजता था। वह रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से दीपक को भेजता था। फैज के साथ सिराज अली और गुफरान भी काम करते थे। एसटीएफ वांछित आरोपियों के बारे में पता लगा रही है।
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