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किस्त नहीं दे पाएंगे फिर भी मकान पर होगा आपका मालिकाना हक

Tue, 28 Jul 2015 03:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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लखनऊ विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद से भवन व भूखंड लेकर पूरा पैसा जमा न करने के बाद डिफाल्टर होकर कब्जा न पाने वालों को अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। आवास विभाग ने इन्हें भवन व भूखंड पर मालिकाना हक देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस)शुरू की है।
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इस योजना में डिफाल्टर होने वाले भूखंड व भवन मालिक विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद में 31 मार्च 2016 तक धन जमा कर सकते हैं। सचिव आवास पंधारी यादव ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ओटीएस निर्धारित सेवा शर्तों के आधार पर ही किया जाएगा।

विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद से भूखंड या भवन लेने के बाद कभी-कभार आवंटी समय से धन जमा नहीं कर पाते हैं। इसके चलते उनकी किस्तों पर ब्याज पर ब्याज जुड़ता जाता है और यह इतना हो जाता है कि आवंटी जमा नहीं कर पाता।
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ऐसे लोगों को डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है। डिफाल्टरों की संपत्ति को विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद चाहे तो दूसरों के नाम आवंटित कर सकते हैं। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ऐसे आवंटियों को अपनी संपत्तियों पर मालिकाना हक देने के लिए ओटीएस योजना लेकर आया है।
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इन सभी को मिलेगा इस योजना का लाभ

इस योजना में सभी प्रकार की आवासीय संपत्तियां,चाहे वह किराये की हों या किस्तों पर ली गई हों तथा नकद खरीदी गई हों,ग्रुप हाउसिंग की संपत्तियां,सभी प्रकार की आवंटित संपत्तियां,स्कूल भूखंड,चैरीटेबल संस्थाओं आदि की रियायती दर पर आवंटित संपत्तियां आएंगी।

इसी तरह सभी प्रकार की व्यावसायिक संपत्तियां चाहे नीलामी की हों या आवंटित और सहकारी आवास समितियों को आवंटित संपत्तियों पर भी ओटीएस योजना का लाभ दिया जाएगा।

कैसे होगा ओटीएस

ओटीएस योजना में सभी डिफाल्टर आवंटियों से संपत्ति आवंटन के समय किस्तों के निर्धारण पर लागू ब्याज दर के बराबर लिया जाएगा। उनसे किसी प्रकार का दंड ब्याज नहीं लिया जाएगा।

आवंटी द्वारा किए गए भुगतान को सबसे पहले डिफाल्ट अवधि तक के ब्याज ओटीएस के आधार पर बकाया मूल धनराशि के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।

ओटीएस गणना में यदि अधिक जमा धनराशि आती है तो उसका समायोजन रजिस्ट्री संबंधी अन्य व्यय जैसे फ्री होल्ड चार्ज,वाटर सीवर चार्ज व अन्य में किया जाएगा।
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