लखनऊ। ग्लूकोमा को अक्सर दृष्टि का मूक चोर कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यह धीरे-धीरे दृष्टि तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो यह स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकता है। यह जानकारी बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता ने दी। इस गंभीर नेत्र रोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 8 से 14 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाएगा।
बलरामपुर अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा सिंह ने बताया कि ग्लूकोमा की सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक बार दृष्टि चली जाए तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए समय पर जांच और नियमित नेत्र परीक्षण बेहद जरूरी है। नियमित जांच से इस रोग को शुरुआत में पकड़ा जा सकता है। कुछ लोगों में ग्लूकोमा होने का जोखिम अधिक होता है, जैसे 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास हो, मधुमेह या उच्च रक्तचाप के रोगी व लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करने वाले लोग। ऐसे व्यक्तियों को विशेष रूप से नियमित नेत्र परीक्षण कराते रहना चाहिए।