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प्रदर्शन से हलकान डीजीपी ने जारी की पुलिसकर्मियों के लिए नई सोशल मीडिया पॉलिसी

Fri, 05 Oct 2018 10:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डीजीपी ओपी सिंह
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एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के बाद कुछ पुलिसकर्मियों का सोशल मीडिया पर असंतोष मुखर होने के बाद डीजीपी मुख्यालय ने एक बार फिर सोशल मीडिया पॉलिसी जारी की है। पूर्व डीजीपी जावीद अहमद के कार्यकाल में बनी इस पॉलिसी में संशोधन कर 17 नियम जारी किए गए हैं।

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संशोधित पॉलिसी में पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर हथियार सहित फोटो डालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अगर यूनिफार्म में फोटो डाली जाए तो वह व्यवस्थित और संपूर्ण होनी चाहिए। किसी के पोस्ट पर भी कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की जाएगी।

यह भी जरूरी कर दिया गया है कि कोई भी पोस्ट डालने पर उसमें लिखना होगा कि यह उनके निजी विचार हैं। इसका विभाग से कोई संबंध नहीं है।

डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिसकर्मियों के लिए 17 बिंदुओं पर जारी सोशल मीडिया पॉलिसी में कहा है कि प्रदेश पुलिस का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर है अथवा नहीं वह पुलिस प्रतिनिधि होता है। सोशल मीडिया पर उसकी व्यक्तिगत गतिविधियां सीधे पुलिस महकमे की प्रतिष्ठा से जुड़ी होती हैं। इसलिए विभाग की गरिमा को देखते हुए पुलिस के लिए भी सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई गई है।

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यह खास बातें हैं सोशल मीडिया पॉलिसी में

  • पुलिसकर्मी को सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट में यह बताना होगा कि वह उसके निजी विचार हैं और विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है।
  • पुलिसकर्मी पुलिस के लोगो, वर्दी, हथियार के साथ तस्वीर नहीं डालेंगे। यदि वर्दी में फोटो है तो वर्दी पूरी होनी चाहिए।
  • पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर अश्लील भाषा या तस्वीर का प्रयोग नहीं करेंगे।
  • यह प्रतिबंध लगाया गया है कि महकमे की कोई भी जानकारी उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए बिना पोस्ट नहीं की जाएगी।
  • पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों और विभाग के विरुद्ध कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
  • पुलिसकर्मी सरकार या उसकी नीतियां, कार्यक्रम, राजनेता के संबंध में टिप्पणी नहीं करेंगे।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकरणों में भी सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
  • पुलिसकर्मी किसी भी राजनीतिक दल, राजनैतिक व्यक्ति, राजनैतिक विचारधारा के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
  • कोई भी पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर अपनी या दूसरे की नियुक्ति का जिक्र नहीं करेगा।
  • सोशल मीडिया पर अपराध की जांच, विवेचना और कोर्ट में लंबित केस के संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की जाएगी।
  • जाति, धर्म, वर्ग, संप्रदाय, व्यवसाय, सेवाएं, संवर्ग, लिंग, क्षेत्र, राज्य के बारे में पूर्वाग्रह या दुराग्रह से ग्रसित कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
  • बलात्कार पीड़िता और नाबालिगों की पहचान या नाम सोशल मीडिया पर उजागर नहीं करेंगे।
  • जिन आरोपियों की शिनाख्त परेड हो, उनका चेहरा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करेंगे। 
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